अमर उजाला की आशंका सच साबित हुई। पुरानी घटनाओं के इतिहास और घटनास्थल के हालात को देखते हुए मंगलवार के अंक में यह अंदेशा जताया गया था कि 22.48 की लूट को किसी अपने की मदद से अंजाम दिलाया गया है। हालांकि इस लूट को अंजाम देने वाले नौसिखिये गैंग ने प्लान बहुत बड़ा किया था। अगर सरेराह कोई विरोध में आता तो बैकअप में फैला जाल गोली चलाने से पीछे नहीं हटता। इसके लिए वह पूरी तरह तैयार था। मगर जब बाइक सवार रुपयों का बैग लेकर आसानी से निकल गए तो बैकअप टीम ने राहत महसूस की और वह भी चुपचाप निकल गए। मगर यह सब सीसीटीवी में कैद हुआ और अधिकारियों ने समीक्षा की तो माठा ठनक गया। बस फिर क्या था, सच्चाई सामने आ गई।
सीसीटीवी ने खोला कैशियर को बट से झूठी चोट का राज
लूट की खबर पर जब डीआईजी डॉ.प्रीतिंदर सिंह, एसएसपी मुनिराज जी सहित पूरा अमला जब मौके पर पहुंचा तो पहली ही पूछताछ में कैशियर रजत ने बताया कि बाइक सवार बदमाश का साथी उसके विरोध करने पर उसके माथे में तमंचे की बट मारकर बैग झपट ले गया। पुलिस ने रजत को मेडिकल परीक्षण के लिए भेजा तो उसके किसी तरह की चोट तो क्या, तमंचे की बट के प्रहार तक की बात सामने नहीं आई। इस पर अधिकारियों का माथा ठनक गया कि हो न हो यह झूठ बोल रहा है। दिन में जो सीसीटीवी देखे गए, उनमें तो बदमाश आते जाते व भागते दिखाई दिए। उनमें बिल्कुल घटनास्थल का कोई सीसीटीवी सामने नहीं आया। मगर रात को बाजार बंद होने पर खुद एसएसपी पूरी टीम के साथ एक बार फिर मौके पर पहुंचे और रात तीन बजे तक घटना स्थल के इर्द-गिर्द के सभी सीसीटीवी पर नजर दौड़ाई गई। इसी बीच घटनास्थल के ठीक सामने ज्वैलरी शोरूम के दरवाजे के ऊपर लगे सीसीटीवी को देखा गया तो सच्चाई सामने आ गई। पूरी लूट उसमें कैद हुई, जिसमें रजत को किसी ने कोई बट नहीं मारी। बदमाश आया, झपट्टा मारकर बैग चलता बना और रजत ने विरोध तक नहीं किया। बस रजत से सच उगलवाने के लिए पुलिस के लिए यही काफी रहा।
किसी ने नहीं किया फोन, आंखों आंखों में हुए इशारे
इस दौरान सर्विलांस टीम टीम के तमाम प्रयास के बाद भी ऐसी कोई कॉल सामने नहीं आई, जिससे यह पता चल सके कि किसी ने बदमाशों को या रजत को या रजत ने किसी को उस दौरान कॉल किसी संदिग्ध नंबर पर की हो। बस आंखों आंखों में इशारे चल रहे थे। खुद रजत ने स्वीकारा कि अमित वर्मा व अभिषेक उर्फ सुमित बाइक पर बैग छीनने के लिए लगे थे। कालू यादव रजत के एलआईसी में अंदर जाने से लेकर बाहर निकलने तक उसके आगे पीछे था और उसका काम बाहर खड़ी टीम को रजत का इशारा मिलते ही काम को अंजाम देने के लिए इशारा करना था। इसके अलावा सुरजीत, शिव कुमार उर्फ गोलू व रोहित चौधरी दो बाइकों पर बैकअप टीम के रूप में थे। उनका काम था कि अगर लूट के बाद भागते समय कोई व्यक्ति रोकता या बाधा बनता है तो उसे गोली मारकर भागेंगे।
घटना के बाद पहुंचे हरदुआगंज, वहीं हुआ रुपयों का बंटवारा
जांच व पूछताछ में स्पष्ट हुआ कि रुपयों का बैग लेकर अमित व अभिषेक सेंटर प्वाइंट से स्टेशन रोड, छर्रा अड्डा पुल के रास्ते पनैठी होते हुए सीधे हरदुआगंज पहुंचे। वहीं बैकअप टीम गांधी आई तिराहे से रामघाट रोड होते हुए हरदुआगंज पहुंची। जहां अमित वर्मा का किराये का कमरा है। वहां अमित अपनी गर्भवती प्रेमिका के साथ रहता है। उसी कमरे पर रुपयों का बंटवारा हुआ। इसमें से सुरजीत, कालू व रजत के हिस्से के रुपये सुरजीत के पास ही रहे। बाकी रुपयों का बंटवारा हो गया। इस बीच रजत की मुलाकात हुई तो एक लाख रुपये उसे चलते-फिरते दे दिए गए।
तीन रात बिना सोए, 300 किमी दौड़े, तब पकड़े गए पांचों
पुलिस टीम पिछले तीन दिन और रात से लगातार बिना सोये अपराधियों के लिए हाथ पैर मार रही थी। अब तक 300 किमी से ज्यादा भागदौड़ कर चुकी थी। इसी बीच बुधवार देर रात रजत से जानकारी मिली तो सबसे पहले जट्टारी पहुंच रोहित को दबोचा, फिर अकराबाद पहुंच अभिषेक पकड़ा। हालांकि बाकी दो नहीं मिले। बाद में खबर मिली वे चारों एक साथ हैं तो उनका पीछा शुरू किया। इसी दौरान तड़के मुठभेड़ में दोनों हाथ लग गए। अब जो दो रह गए हैं, उनके लिए टीम जुटी हुई है।
खुलासा टीम की एसएसपी ने ठोंकी पीठ, शासन तक से बधाई
लॉकडाउन खुलते ही प्रदेश में सबसे बड़ी घटना की मॉनीटरिंग खुद डीजीपी कर रहे थे। इसी कड़ी में एडीजी तक ने दौरा किया था। डीआईजी एसएसपी खुद पल-पल का अपडेट टीम से लेकर लखनऊ तक को अवगत करा रहे थे। प्रमुख सचिव गृह ने खुलासा टीम को 50 हजार के इनाम की घोषणा करते हुए एसटीएफ तक को लगाने की बात शुरू कर दी थी। जिले से बाहर जा चुके पुराने पुलिस अधिकारियों तक की मदद लेने की बात आई। मगर डीआईजी और एसएसपी ने अपनी टीम पर भरोसा जताया और सफलता मिली। इस टीम में शामिल इंस्पेक्टर सिविल लाइंस प्रमेंद्र कुमार, इंस्पेक्टर क्वार्सी छोटेलाल, एसओ जवां अभय शर्मा, सर्विलांस प्रभारी संजीव कुमार, राकेश कुमार, ओमवीर सिह, जुल्कर नैन, विनोद कुमार, दुर्विजय, मनोज कुमार, सतीश कुमार, नवीन कुमार, शोएब आलम, गौरव कुमार, अखिल प्रताप, विजय कुमार, एसआई योगेशचन्द्र गौतम, मुकेंद्र कुमार, सौरभ शर्मा हर्षवर्धन चौहान, शिमाल अहमद,आशीष, हरवचन सिंह की एसएसपी ने पुलिस लाइन में पीठ ठोंकी और शासन से आई बधाई व इनाम की घोषणा की। डीआईजी ने भी टीम को बधाई दी।
लॉकडाउन में तंगी पर ऐसे बना लूट प्लान
इस लूट में शामिल पूरी टीम छोटी मोटी नौकरी करती थी। लॉकडाउन में काम धंधे बंद होने के कारण सभी तंगी से गुजर रहे थे। हां, चार महीने पहले ही सीएमएस कंपनी में नौकरी पर लगे रजत के मुंह से अक्सर सुरजीत बड़ी रकम आने जाने की बातें सुनता था। इस पर उसके मन में लालच आ गया और उसने रजत को इस लूट को अंजाम देने के लिए तैयार कर लिया।
एसएसपी के अनुसार सुरजीत और रजत एक ही मोहल्ले में अकराबाद में रहते हैं और अच्छे दोस्त हैं। पूर्व में सुरजीत सिकंदराराऊ से रेप के एक मुकदमे में जेल गया था और 6 जून 2019 को छूटा था। उसने जब यह प्लान बनाया तो टीम की जरूरत पड़ी। उसने अपने सभी दोस्तों को इसके लिए तैयार किया और अपनी प्रेमिका को लेकर जहांगीराबाद से यहां आकर किराये पर रह रहे अमित के कमरे पर पूरी प्लानिंग बनी। कई दिन एलआईसी वाले घटनास्थल की और गाड़ी की टाइमिंग की रैकी हुई। बाइक की जरूरत के लिए हरदुआगंज से एक बाइक चोरी की गई। जिसका मुकदमा हरदुआगंज में दर्ज है। इसके बाद शुक्रवार को यह लूट के लिए आए। मगर उस दिन रजत ने बता दिया कि अगर सोमवार को कांड करेंगे तो ज्यादा रकम मिलेगी। इसलिए यह प्लान बदला गया और सोमवार को घटना को अंजाम दिया गया।
एक सप्ताह से रजत की किसी ने नहीं मोबाइल पर बातचीत
इस दौरान सर्विलांस टीम ने यह भी पाया कि रजत ने प्लानिंग के तहत अपने किसी साथी से पिछले एक सप्ताह से मोबाइल पर कोई बात नहीं की। ताकि किसी को उसकी कॉल डिटेल में किसी तरह का शक न हो। मगर उसके एक झूठ ने सब भंडा फोड़ दिया।
यह हुआ बरामद
कुल 12 लाख 21 हजार रुपये नकद, 2 तमंचा 315 बोर, 6 खोखा व 3 कातरूस, दो बाइक, दो मोबाइल