बंजर, जल जमाव वाली भूमि को कृषि योग्य बनाने के लिए किसानों के आवेदन मिल रहे हैं। देसी तकनीक से ऐसी भूमि को उपजाऊ बनाया जा रहा है। किसानों को भी तकनीक की जानकारी दी जा रही है। 350 हेक्टेयर भूमि को कृषि योग्य बनाने का नया लक्ष्य मिला है, इसके लिए तैयारियां चल रही हैं।- डॉ दिव्या मौर्य, भूमि संरक्षण अधिकारी
नौरथा, बिरनेर, पहाड़गढ़ी और उत्तमगढ़ी के बीच करीब 200 बीघा से भी अधिक भूमि बंजर रहती थी। यहां फसल उगाना तो दूर घास तक नहीं उगती थी। आज तकनीकी मदद और किसानों की खुद की मेहनत से यहां खेती हो रही है। -वीरेंद्र बघेल, बिरनेर
ककेथल के आसपास सैकड़ों बीघा जमीन बंजर पड़ी हुई थी, इसका समतलीकरण कराया गया। कृषि विभाग और मनरेगा से भूमि सुधार के कार्य कराए गए। आज जहां गेहूं और धान की पैदावार हो रही है।-सत्यप्रकाश प्रजापति ककेथल
ऐसे बनाया भूमि को उपजाऊ
रिमोट सेंसिंग तकनीक से सैटेलाइट मैपिंग की और तीन चरणों में भूमि सुधार के कार्य शुरू किए गए। पहले चरण में जमीन को समतल कर मेड़बंदी की गई, फिर इसमें पानी भरकर धान की पुआल बिछा दी गई। इससे खाद बना और जमीन में जीवांश कार्बन की मात्रा बढ़ने लगी और मिट्टी में सोडियम की मात्रा कम होने लगी। यह प्रक्रिया लगातार दोहराई गई। इसके बाद गहरी जुताई कराकर ढेंचा की बुवाई कराई, जमीन को हरी खाद मिली। कृषि विशेषज्ञों की माने तो ढेंचा वातावरण से नाइट्रोजन अवशोषित कर उर्वरा शक्ति बढ़ाता है। इसके बाद गेहूं और धान की खेती कराई गई।
यह भी जानें
- 3.04 लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि है जिले में
- 6000 हेक्टेयर बंजर भूमि जिले में चिह्नित है
- 4020 हेक्टेयर भूमि जिले में अभी भी बंजर है