बारहसैनी कॉलेज सोसायटी के सात पदों और 14 सदस्यों के 22 दिसंबर को होने वाले चुनाव को लेकर समन्वय स्थापित करने के अथक प्रयासों को झटका देने का आरोप लगाया गया है। सदस्यों ने साठगांठ कर चुनाव अधिकारी पर कानूनी कार्रवाई एवं चुनाव का बहिष्कार करने की धमकी देकर अपनी सूची को ही विजयी प्रत्याशियों की सूची घोषित करवाने का दबाव बनाने का आरोप लगाया है। अब ऐसे सदस्यों ने कानूनी लड़ाई लड़ने का एलान किया है। चुनाव में 67 व्यक्तियों द्वारा 82 नामांकन पत्र भरे गए थे।
सोसायटी के अजय नंदन, संजय कुमार गुप्ता, डॉ. पीसी गुप्ता, सुशील कुमार, प्रदीप कुमार, वीरेंद्र कुमार वार्ष्णेय, दिनेश कुमार गुप्ता ने आरोप लगाया है कि अतुल गुप्ता ग्रुप द्वारा एक कुत्सित नीति के तहत प्रधान पद पर अजय नंदन ग्रुप के नितिन कुमार ऽ घुटीऽ के विरुद्ध दो, नितिन कुमार वार्ष्णेय के नामांकन पत्र और सीए गौरव वार्ष्णेय के विरुद्ध दो और नामांकन पत्र दाखिल किए गए थे।
उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के विकास को गति प्राप्त हो, इसके लिए इं दिनेश चंद्र वार्ष्णेय को अजय नंदन ग्रुप और सीए अतुल गुप्ता ग्रुप के मध्य सामंजस्य स्थापित कर एक 21 सदस्यीय कार्य समिति के चयन का अधिकार दे दिया गया। इं. दिनेश चंद्र वार्ष्णेय ने अपने विवेक से अपने दो मित्रों राजीव आंधीवाल, जितेंद्र बैंकर, अपने रिश्तेदार बीडी गुप्ता, सीए अनिल गुप्ता समेत नौ सदस्यों की समन्वय समिति का गठन कर लिया। इस समिति में दोनों ग्रुप से दो-दो सदस्य नामित किए। अतुल गुप्ता ग्रुप से नवीन चंद्र एवं राजकुमार सीएल, अजय नंदन ग्रुप से अजय नंदन एवं सुशील कुमार नामित हुए।
इं. दिनेश के आवास पर समन्वय समिति की घंटों तक चली बैठक बेनतीजा रही। इसी क्रम में धर्मशाला में एक बैठक हुई। जहां पहले सभी प्रत्याशियों से नामांकन वापसी के फार्म भरवा कर ले लिए गए। आरोप है कि दिनेश चंद्र वार्ष्णेय ने 21 सदस्यीय कार्य समिति की घोषणा नहीं की। उल्टे प्रत्याशियों को अतुल, सचिन आर्या द्वारा फोन कर बुलाकर खाली कागज पर हस्ताक्षर करा लिए। इसके बाद उपस्थित प्रत्याशियों और समन्वय समिति के सदस्यों से चुनाव कार्यालय पहुंचने को कहा।
खुद भी चुनाव कार्यालय पहुंच गए। चुनाव अधिकारी ने निष्पक्षता का परिचय देते हुए उन्हें स्वीकार करने से इंकार कर दिया और कहा कि नामांकन वापस करने वाले प्रत्याशी की उपस्थिति अनिवार्य है। नामांकन वापसी का समय समाप्त हो रहा था और किसी को 21 सदस्यीय सूची की भनक नहीं थी। आरोप है कि मनमाने ढंग से बिना किसी नियम के अपने निकट रिश्तेदारों भांजी दामाद विष्णु कुमार गुप्ता, समधन प्रीति वार्ष्णेय, साले के पुत्र तुषार वार्ष्णेय का नाम विभिन्न पदों पर शामिल कर रखा था।
कार्यकाल पूरा चुके कौशल किशोर और धीरेंद्र गुप्ता के साथ आरोपी अतुल गुप्ता को प्रधान घोषित कर रखा था। पिछले साल डॉ. इंदु वार्ष्णेय प्रकरण को जन्म देने वाले सचिन आर्य को ज्वाइंट सेक्रेटरी पद दे दिया था। आरोप है कि डॉ. पीसी गुप्ता ने जब इं. दिनेश को बताया कि आपसे विश्वासघात की उम्मीद नहीं थी तो वह आपा खो बैठे और अपशब्दों का प्रयोग करते हुए दुर्व्यवहार कर धमकाया।