सपा से गठबंधन के बाद कोल विधानसभा क्षेत्र से सपा प्रत्याशी तय होने के बावजूद कांग्रेस नेता विवेक बंसल द्वारा कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर किया गया नामांकन तकनीकी पेंच में फंसता नजर आ रहा है। यदि उन्हें पार्टी से सिंबल मिल गया तब तो ठीक है, यदि नहीं मिला तो वह नियमानुसार निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी चुनाव नहीं लड़ सकेंगे।
नियमानुसार जब तक किसी भी मान्यता प्राप्त दल के प्रत्याशी को पार्टी द्वारा जारी ए एवं बी फार्म नहीं मिल जाता है तब तक उसे अधिकृत प्रत्याशी नहीं माना जाता है। इस नियम के परिप्रेक्ष्य में कांग्रेस नेता विवेक बंसल की दावेदारी को आंके तो उन्हें अब तक पार्टी आलाकमान से बतौर प्रत्याशी न तो हरी झंडी मिली है और न ही गठबंधन के चलते मिलने की संभावना नजर आ रही है। ऐसे में उनके द्वारा पार्टी प्रत्याशी के तौर पर किया गया नामांकन फंस सकता है। कोल के आरओ एवं एसडीएम कोल डा.पंकज वर्मा ने बताया कि पार्टी प्रत्याशी को अपना मात्र एक प्रस्तावक रखना होता है जबकि निर्दलीय प्रत्याशी के लिये कम से कम दस प्रस्तावक मान्य हैं। ऐसे में यदि कांग्रेस नेता विवेक बंसल को पार्टी से सिंबल नहीं मिलता है तो उनकी दावेदारी मात्र एक प्रस्तावक होने के चलते निर्दलीय प्रत्याशी के मानकों को भी पूरा नहीं करेगी और स्वत: ही समाप्त हो जाएगी।
बंसल को मिला रालोद से टिकट का ऑफर
अलीगढ़। पूर्व विधायक व कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता विवेक बंसल को रालोद से टिकट का ऑफर मिला है। इस पर बंसल ने अभी अपने पत्ते नहीं खोले हैं और वह रालोद के नेताओं को बिना कुछ जवाब दिए ही दिल्ली चले गए हैं। इस बारे में रालोद जिलाध्यक्ष चौ.कल्यान सिंह ने बताया कि पार्टी ने अभी छर्रा, अलीगढ़ शहर व कोल से प्रत्याशी घोषित नहीं किए हैं। पार्टी ने पूर्व विधायक विवेक बंसल के समक्ष भी टिकट की पेशकश की है। वैसे अभी उनका जवाब नहीं मिला है। उनका कहना है कि पार्टी तीनों सीटों पर मंगलवार की सुबह तक प्रत्याशी तय कर लेगी और इनका नामांकन कराएगी। अतरौली से पार्टी ने वीरेश यादव के बहनोई मनोज यादव को टिकट दिया है।