पुलिस की जांच में उजागर हुआ कि कदीर पूर्व में खुद बैंकों से ऋण कराने की एजेंसी चलाता था। वह इसके लिए किसी भी प्रॉपर्टी के दो तीन दशक से अधिक पुराने फर्जी दस्तावेज बनाता था, जिसमें उसका स्वामी अपने परिचित ग्राहक को बना देता था। निजी क्षेत्र की बैंक जब जांच करती तो पुराना रिकॉर्ड ऑनलाइन न होने के कारण उसी व्यक्ति को प्रॉपर्टी का स्वामी मान लेती। कदीर का ग्राहक से वायदा होता था कि वह ऋण की आधी या उससे अधिक रकम लेगा और किस्त भी ग्राहक को नहीं देनी पड़ेगी। अब तक जांच में उसने आधार, शुभम व एक अन्य बैंक के करीब 20 ग्राहकों को तीन करोड़ से अधिक ऋण कराना उजागर हुआ है। अधिकांश ग्राहक मुस्लिम आबादी वाले हैं।
कदीर के फर्जीवाड़े की जांच में अब तक दो दर्जन से अधिक फर्जी तरह से ऋण लेना सामने आया है। बहुत से लोगों के रुपये भी फर्जीवाड़ा कर ठगे हैं। इसके विषय में जो भी शिकायतें आ रही हैं, उन्हें एक ही मुकदमे में उसी विवेचक को देना तय किया है। फिलहाल साक्ष्य मिलने पर जेल भेजा गया है। -अभय पांडेय, सीओ तृतीय