इलाहाबाद बैंक की समद रोड शाखा से जालसाज द्वारा चार अलग-अलग स्थानों के क्लोन चेक लगाकर 94.74 लाख रुपये उड़ाने के मामले से हड़कंप मचा हुआ है। इस प्रकरण के बाद बैंककर्मियों के साथ डाक विभाग की कार्यप्रणाली भी संदेह के दायरे में आ गई है। नया खाता खुलने पर बैंक मुख्यालय से जारी होने वाले थैंक्स लैटर ने संदेह को और बल दे दिया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जालसाज द्वारा लाखों का फ्राड करने के बाद बैंककर्मी अब तक उसका पता नहीं ढूंढ सके, उस पते को डाकिये ने कैसे ढूंढ लिया और बैंक का थैंक्स लैटर उस तक पहुंचा दिया। दूसरा अहम सवाल यह है कि शातिर ने एक करोड़ 25 लाख 500 रुपये विभिन्न खातों से अपने खाते में डाल लिये और चार बार में उसमें से 94.74 लाख रुपये निकाल लिये, तब भी बैंक अफसरों के कान खड़े नहीं हुए। यही नहीं जिन लोगों के खातों से पैसा निकला, उन्हें इसकी सूचना तक नहीं मिली और मिली भी तो उन्होंने आपत्ति दर्ज क्यों नहीं कराई?
यह है प्रकरण
समद रोड इलाहाबाद बैंक के शाखा प्रबंधक वरुण कोहली के मुताबिक मंजूरगढ़ी मिर्जापुर सिया निवासी रवींद्र कुमार मल्होत्रा पुत्र राम मल्होत्रा ने 16 मई 2019 को शाखा में अपना बचत खाता संख्या 50487226294 खुलवाया था। खाता खुलवाने के दौरान केवाईसी की सारी प्रक्रिया पूर्ण की गई। पैन कार्ड व आधार कार्ड भी लगाए और एक हजार रुपया जमा भी किया। इस खाते से छह माह तक कोई लेन देन नहीं किया। इसके बाद अचानक 27 नवंबर को भागलपुर विश्वविद्यालय बिहार की इलाहाबाद बैंक ब्रांच का 27 लाख 20 हजार 500 रुपये का चेक जमा किया और उसके बाद 25 लाख रुपये निकाल लिये। 29 नवंबर को भागलपुर विश्वविद्यालय ब्रांच का 22.50 लाख का चेक जमा कर 22 लाख रुपया निकाल लिया।
27 दिसंबर को गुरुग्राम के सेक्टर 56 की हुड्डा मार्केट स्थित शाखा का 25.80 लाख रुपये का चेक जमा कर 25 लाख निकाल लिये। 30 दिसंबर को केजी मेडिकल कालेज लखनऊ स्थित ब्रांच का 49.50 लाख का चेक लगाकर 20 लाख रुपये निकाल लिये। दो जनवरी 2020 को उसने 1 करोड़ 30 लाख 50 हजार का चेक जमा किया। तब कही जाकर बैंक अफसरों के कान खड़े हुए। वरिष्ठ प्रबंधक ने जब उक्त शाखाओं को चेक के फोटो भेजकर जानकारी की तो पता चला कि सभी क्लोन चेक थे।
यह पांच अहम सवाल
1- बैंक के वरिष्ठ प्रबंधक कह रहे हैं जालसाल का पता नहीं मिला, यदि ऐसा है तो डाकिये को कैसे पता मिल गया और कैसे उसने खाता खोलने के एवज में जारी थैंक्स लैटर जालसाज तक पहुंचा दिया।
2- बैंकों का पत्र व्यवहार स्पीड पोस्ट से आनलाइन होता है। डाकिया उसे संबंधित पते पर पहुंचाता है। यदि जालसाज का पता फर्जी था तो थैंक्स लैटर कैसे उस तक पहुंचा। क्या उसकी डाकिये से मिलीभगत थी, जो उसने अपने असली पते के बजाय लैटर डाक विभाग के कार्यालय अथवा अन्य स्थान से प्राप्त कर लिया।
3- प्रबंधक के मुताबिक समूचा ट्रांजेक्शन मैनेजर आपरेशन की देखरेख में हुआ और जालसाज ने चार बार में 94.74 लाख निकाल लिये। पांचवीं बार जब 1.30 करोड़ का चेक जमा हुआ तब उन्होंने वरिष्ठ प्रबंधक को जानकारी दी।
4-सवाल यह है कि जब लाखों का ट्रांजेक्शन हुआ तब उन्हें संदेह क्यों नहीं हुआ और उन्होंने वरिष्ठ प्रबंधक से सलाह मशवरा उचित क्यों नहीं समझा।
5-बड़े ट्रांजेक्शन होने पर बैंक आधार कार्ड से लेकर अन्य औपचारिकताएं पूर्ण कराता है। फर्जीवाड़ा करने वाले के मामले में ऐसा कुछ नहीं किया गया, जबकि उसने हर बार लाखों का लेन देन किया।
-हमने जालसाज की खोजबीन कराई, लेकिन उसका पता फर्जी निकला। आरोपी रवींद्र कुमार मल्होत्रा के खिलाफ सिविल लाइन थाने में रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है। पुलिस जांच करेगी। इस मामले में विभागीय स्तर से भी जांच होगी।
-वरुण कोहली, वरिष्ठ प्रबंधक इलाहाबाद बैंक
पुलिस ने बैंक से मंगाए प्रपत्र, होगा सत्यापन
अलीगढ़। इस मामले में मुकदमा दर्ज करने के बाद इंस्पेक्टर सिविल लाइंस अमित कुमार ने बताया कि अभी सबसे पहले खाता धारक द्वारा बैंक में लगाए गए सभी प्रपत्र मांगे गए हैं। ताकि उनका सत्यापन कराया जा सके। इसके बाद इस मुकदमे की जांच की दिशा तय होगी। उन्होंने बताया कि बाकी उन चारों बैंक शाखाओं से सभी संपर्क किया जा रहा है, जहां से रुपये जारी हुए हैँ।