विलाप करते परिजन, कार को निकालती क्रेन
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बेटी के लिए डोली सजानी थी, अर्थी उठानी पड़ी
एक पिता के लिए इससे ज्यादा दर्दनाक और क्या होगा कि जिस बेटी के हाथों में मेहंदी रचाने के लिए वह सुयोग्य वर और अच्छे रिश्तों की तलाश कर रहा था, आज उसी लाडली की डोली की जगह उसकी अर्थी के सामने खड़ा होना पड़ा। देहरादून से अलीगढ़ आते-आते उनकी सांसें उखड़ने लगी थी।
तान्या शर्मा के पिता जीवन लाल शर्मा जब बुधवार शाम करीब चार बजे बदहवास हालत में देहरादून से अलीगढ़ पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, तो वहां का मंजर देखकर हर दिल रो पड़ा। पोस्टमार्टम हाउस के बाहर एक पेड़ के नीचे बिल्कुल अकेले और बदहवास खड़े जीवन लाल शर्मा की पथराई आंखें जैसे आसमान से अपनी बेटी को वापस मांग रही थीं। उन्होंने रुंधे गले से बताया कि उनके दो ही बच्चे थे, एक बेटा और एक बेटी तान्या। तान्या घर की रौनक थी, सबकी लाडली थी। पिता अपनी इस होनहार बेटी की शादी के सपने संजोए हुए थे।
पिता के नक्शेकदम पर ही चुनी थी बैंकिंग की राह
जीवन लाल शर्मा पंजाब नेशनल बैंक में बतौर प्रबंधक अपनी सेवाएं दे चुके हैं। तान्या ने भी पिता को अपना आदर्श माना और उन्हीं के नक्शे कदम पर चलते हुए बैंकिंग क्षेत्र को अपने कॅरिअर के रूप में चुना। पिता को गर्व था कि उनकी बेटी भी उन्हीं की तरह एक बैंक अधिकारी बनकर समाज की सेवा कर रही है।
जब कुछ लोगों ने ढांढस बंधाने के लिए उनसे बात करने की कोशिश की, तो एक बेबस और टूटे हुए पिता ने रोते हुए सिर्फ अपने कांपते हाथ हिला दिए। आंसुओं के सैलाब के बीच उनके मुंह से बस इतने ही शब्द निकल सके मैं अब कुछ नहीं कह सकता... मेरी बेटी इस तरह हमें छोड़कर चली जाएगी, मैंने सपने में भी नहीं सोचा था।