अलीगढ़। 10वां वेतन समझौता अक्षरश: लागू करने की मांग कर रहे ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त्त के कर्मचारी एवं अधिकारी मंगलवार को एक दिवसीय हड़ताल पर रहे। इसकी वजह से ग्रामीण बैंक के कारोबार पर व्यापक असर पड़ा। जनपद में कुछ बैंक शाखाएं तो अवश्य खुलीं, लेकिन कारोबार आधा-अधूरा ही हुआ।
यूनाइटेड फोरम ऑफ आरआरबी यूनियंस के आह्वान पर ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त्त के कर्मचारी हड़ताल पर रहे। सेंटर प्वाइंट स्थित क्षेत्रीय कार्यालय पर आयोजित धरना-प्रदर्शन को संबोधित करते हुए ग्रामीण बैंक ऑफ आर्यावर्त्त अधिकारी एसोसिएशन के महामंत्री सुधीर सक्सेना ने कहा कि भारत सरकार द्वारा ग्रामीण बैंककर्मियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जा रहा है।
सरकार द्वारा 10 वां वेतन समझौता अक्षरश: लागू करने में आनाकानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जब राष्ट्रीयकृत बैंकों में अनुकंपा के आधार पर भर्ती जारी कर दी गयी है तो ग्रामीण बैंकों को इससे विरत क्यों रखा जा रहा है। जिला मंत्री लटूरी सिंह ने कहा कि एक ओर भारत के प्रधानमंत्री द्वारा अपनी समस्त कार्ययोजना बैंकों से कराई जा रही हैं, जिसमें ग्रामीण बैंकों की अहम भूमिका है। दूसरी ओर ग्रामीण बैंक कर्मचारियों के साथ दोहरी नीति अपनायी जा रही है।
राष्ट्रीय कृत बैंकों में 10 वां वेतन समझौता लागू हो चुका है। ग्रामीण बैंकों को पेंशन से भी विरत की जा रही है। यूनियन के संयोजक डीएन त्रिवेदी से बातचीत का हवाला देते हुए नेताओं ने कहा कि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो 11 जुलाई को प्रस्तावित बैंक में दो दिन की हड़ताल का निर्णय लिया जा सकता है। यूनियन अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने का भी निर्णय ले सकती है। सभा को एमए किदवई, अश्वनी चौटाला आदि ने संबोधित किया।