कलेक्ट्रेट पर जौहर विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण के विरोध में सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। पुलिस को प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री का पुतला फूंके जाने की आशंका हुई, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती की। इसी दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक हो गई थी।
जौहर विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण के विरोध में अलीगढ़ में हुए प्रदर्शन के मामले में सपा नेताओं को राहत नहीं मिली है। मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने गोपाल सैनी और बाबू सिंह धनगर की जमानत याचिका खारिज कर दी है। वहीं, मामले में आरोपी सपा नेता जैकी ठाकुर ने अदालत में समर्पण याचिका दाखिल की है।
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24 जुलाई को कलेक्ट्रेट पर जौहर विश्वविद्यालय के ध्वस्तीकरण के विरोध में सपा कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया था। पुलिस को प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री का पुतला फूंके जाने की आशंका हुई, जिसके बाद पुलिस ने सख्ती की। इसी दौरान पुलिस और सपा कार्यकर्ताओं के बीच नोकझोंक हो गई थी। पुलिस का आरोप है कि विवाद बढ़ने पर प्रदर्शनकारियों ने सिविल लाइन इंस्पेक्टर सतवीर सिंह और अन्य पुलिसकर्मियों को खदेड़ने का प्रयास किया। इसी दौरान सपा नेता गोपाल सैनी ने इंस्पेक्टर को धक्का दे दिया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए इंस्पेक्टर को अपनी सर्विस पिस्टल निकालनी पड़ी थी।
इस मामले में पुलिस ने सात नामजद और 40 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने गोपाल सैनी और बाबू सिंह धनगर को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। अदालत ने दोनों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया है।
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जेल में सपा नेताओं से मिले पदाधिकारी
जेल में बंद सपा कार्यकर्ताओं से महानगर अध्यक्ष अब्दुल हमीद घोसी और जिला महासचिव मनोज यादव ने मुलाकात की। उन्होंने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की कानूनी लड़ाई लड़ेगी। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि कार्यकर्ताओं पर फर्जी रिपोर्ट दर्ज कर जेल भेजा गया है। उन्होंने कहा कि मामले को लेकर उच्च अधिकारियों से वार्ता कर न्याय की मांग की जाएगी। जमानत से लेकर आगे की सभी कानूनी कार्रवाई पार्टी स्तर से की जाएगी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी अपने कार्यकर्ताओं के साथ खड़ी है।