आरोपियों के हाथ लगी फोटो कॉपी और फोटो
पीड़ित ओम प्रकाश पक्ष के मुताबिक एक बार सिम कार्ड लेने के सिलसिले में उन्होंने अपने आधार कार्ड की फोटो कॉपी कराई। साथ ही कुछ फोटो भी खिंचवाए थे। यहीं से उनका आधार कार्ड और फोटो आदि आरोपियों के हाथ लग गए, जिसका इस्तेमाल फर्जी तरीके से जमानत लेने में किया गया।
सत्यापन प्रक्रिया सवालों के घेरे में
इस केस में जमानत लेने वालों की और उनके दस्तावेज की सत्यापन प्रक्रिया पर विधि के जानकार सवाल उठा रहे हैं। एडवोकेट देवेश गौतम कहते हैं कि किसी भी मामले में जमानत लेने के लिए पहले जमानतदार का आधार कार्ड, फोटो आदि से दस्तावेज तैयार होते हैं। कोर्ट उसको थाने के पैरोकार पर भेजती है। थाने का पैरोकार संबंधित गांव का प्रधान या शहर में सभासद से पत्र पर उसका सत्यापन लेकर कोर्ट को वापस भेजता है। इसके बाद भौतिक रूप से भी जमानतदार को हाजिर होना पड़ता है। इसी के साथ अचल संपत्ति आदि के भी दस्तावेज लगते हैं, जिसका सत्यापन तहसील स्तर से होता है। इस मामले में यह सभी प्रक्रिया सवालों के घेरे में है और जांच का विषय है।