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सत्रह साल बाद सरकारी कागज में ‘जिंदा’ हुए बाबू सिंह

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बाबू सिंह। - फोटो : GANGIRI
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पंकज त्रिपाठी अभिनीत फिल्म ‘कागज’ के वास्तविक चरित्र ‘लाल बिहारी मृतक’ जैसा 17 साल तक जीवन जीने और लगातार संघर्ष करने वाले बाबू सिंह फिर से सरकारी कागजों में ‘जिंदा’ हो गए हैं। नायब तहसीलदार की रिपोर्ट पर बृहस्पतिवार को 71 वर्षीय बाबू सिंह का नाम फिर से खतौनी में दर्ज हो गया। यह पल बुजुर्ग बाबू सिंह के लिए बेहद भावुक रहा और खतौनी में अपना नाम देखकर उनकी आंखों में खुशी के आंसू आ गए।
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गंगीरी क्षेत्र के गांव शादीपुर निवासी 71 वर्षीय बाबू सिंह के अनुसार करीब 17 साल पहले हलका लेखपाल ने उन्हें मृत दिखा दिया था। उनके दो बेटे हैं लेकिन मृत दिखाने के बाद ‘वारिसान’ में बेटों के नाम भी खतौनी में नहीं दर्ज किए। तबसे से वह लगातार तहसील के कर्मचारियों, अधिकारियों के दर पर फरियाद करते घूम रहे थे।
20 जनवरी को बाबू सिंह ने तहसील दिवस में पहुंचकर अधिकारियों के सामने फिर से फरियाद लगाई कि ‘मैं अभी जिंदा हूं, लेखपाल ने मुझे मरा हुआ दिखा रखा है। मुझे फिर से जिंदा कर दो...। उनके प्रार्थना पत्र पर अधिकारी अचरज में पड़ गए। तत्काल नायब तहसीलदार दिनेश चंद्र शर्मा को जांच की जिम्मेदारी दी गई। नायब तहसीलदार गांव शादीपुर पहुंचे। बाबू सिंह समेत उनके परिवार, पड़ोसियों एवं ग्रामीणों से बात कर जांच रिपोर्ट तैयार की। उनकी रिपोर्ट के आधार पर 17 साल बाबू बाबू सिंह जिंदा हो गए।
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