काले तेल के अवैध कारोबार के लिए कुख्यात जिला पंचायत सदस्य पति व थाने का टॉप 10 अपराधी बबलू प्रधान मोहकमपुर को इस बार कड़ी कार्रवाई झेलनी पड़ेगी। एक तरफ पुलिस जहां उसे गैंगेस्टर एक्ट में निरुद्ध करने की तैयारी कर रही है। वहीं इसी एक्ट के तहत उसकी अपराध से अर्जित की गई संपत्ति को जब्त करने की तैयारी है। इसके अलावा उसकी हिस्ट्रीशीट भी तैयार की जा रही है। शनिवार रात मुठभेड़ में हथियार सहित गिरफ्तारी के बाद रविवार को उसे जेल भेज दिया गया है।
एसपी देहात अतुल शर्मा ने पुलिस लाइन सभागार में प्रेसवार्ता में रविवार को बताया कि शनिवार की शाम को करीब पांच बजे मोहकमपुर के प्रधान बबलू प्रधान की मुठभेड़ के बाद गिरफ्तारी की थी। इसका साथी रोहिताश मौके से भाग गया। काले तेल का माफिया बबलू पहलवान कोतवाली से 24 जुलाई को फरार हो गया था। पुलिस को जानकारी मिली है कि वह इस बीच रोहतक, भरतपुर, नोयडा, प्रयागराज व मथुरा में रहा। एसपी देहात ने बताया कि अब प्रधान व उसके साथियों के खिलाफ गैंगेस्टर एक्ट की कार्रवाई होगी, जिसके बाद गैंगेस्टर एक्ट की धारा 14/1 के तहत प्रधान द्वारा अपराध से अर्जित संपत्ति को जब्त किया जाएगा और हिस्ट्रीशीट भी खोली जाएगी।
बता दें कि 18 मार्च को एसपी देहात की मौजूदगी में हुई छापेमारी में बबलू के गोदाम से अवैध कारोबार पकड़ा गया था। इसी मुकदमे में यह फरार था। अब उसे उस मुकदमे के अलावा थाने से भागने, पुलिस मजामत, मुठभेड़ व हथियार रखने आदि आरोपों में जेल भेजा गया है।
थाने आने पर पता चला जेल भेजेंगे तो भाग गया
ट़ॉप-10 अपराधी बबलू पहलवान के बयान ने इलाका पुलिस की भूमिका पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उसका कहना है कि 24 जुलाई को उसको एक पुलिस कर्मी ने फोन करके बुलाते हुए कहा था कि आबकारी अधिनियम के तहत दर्ज मुकदमे में जमानत के लिए थाने आ जाना। इस बात पर वह अपनी गाड़ी से कोतवाली में एक बालक के साथ गया था। कोतवाली में पहुंचने पर ही एक पुलिस कर्मी ने यह बताया था कि आबकारी अधिनियम में दर्ज मुकदमे में जमानत की बात छोड़ो, तुम्हें आवश्यक वस्तु अधिनियम में दर्ज मुकदमे में जेल भेजा जाएगा। यह जानकारी मिलने के बाद ही वह कोतवाली से निकल आया था। अब उसने अंतरिम जमानत अर्जी खारिज होने पर न्यायालय में समर्पण के लिए अर्जी लगा रखी थी, जिसमें 13 अगस्त तारीख नियत थी और समर्पण के इरादे से ही वह गांव आया था। यह बातें उसने मीडिया से बातचीत में कही हैं। आरोपी की बातों ने कोतवाली पुलिस को कठघरे में खड़ा कर दिया है। उल्लेखनीय यह भी है कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने सीओ इगलास को इस मामले में लापरवाही की जांच भी सौंपी थी।