डा. भीमराव अंबेडकर की 125वीं जयंती गुरुवार को मनाई जाएगी। 2017 में विधानसभा में चुनाव होने हैं, इसलिए इस बार की जयंती सभी राजनीतिक दलों के लिए एक पर्व है, जिससे अधिक से अधिक दलित वोट बैंक को अपनी ओर मोड़ा जा सके।
सपा, भाजपा, कांग्रेस, रालोद सभी जयंती मनाएंगे। लेकिन दलितों के लिए शुरू हुई जनकल्याणकारी योजनाओं की खस्ता हालात से किसी को कोई सरोकार नहीं है। तीन प्रमुख योजनाओं का हाल ऐसा है कि प्रशासनिक अधिकारी और सत्तारूढ़ दल के नेता जवाब देने से भी कतराते हैं। हां, बसपा के नेता सीना ठोक कर कहते हैं कि उनकी सरकार वापस आएगी तो फिर से दलित कल्याणकारी योजनाएं परवान चढेंगी।
मायावती शासन में अलीगढ़ में मान्यवर कांशीराम शहरी गरीब आवास योजना के तहत एलमपुर में आवास बनाए गए थे। 2010 में कुछ आवासों का आवंटन हुआ। इस बीच में विवाद भी हुआ। लेकिन आज तक इन आवासों में बिजली और पानी का कनैक्शन नहीं है।
नौरथा अतरौली में बने आवासों का हाल भी ऐसा ही है। मुकुंदपुर में करोड़ों की लागत से बने एससीएसटी आईएएस पीसीएस चयन प्रशिक्षण कोचिंग सेंटर में भी व्यवस्थाएं चरामरा गई हैं। कमोबेश कुछ ऐसा ही हाल छेरत में 100 करोड़ की लागत से बने होम्योपैथिक हास्पिटल एंड मेडिकल कालेज का हैं। जहां सालों से कुछ बजट का इंतजार है।
इस इंतजार में पूरा सेटअप पुराना होता जा रहा है। मायावती सरकार में शुरू हुई इन योजनाओं पर सपा सरकार ने कोई ध्यान नहीं दिया। सवाल ये है कि क्या बाबा साहब की प्रतिमा पर माल्यार्पण करने से ही दलितों का हित पूरा हो जाएगा या फिर सही मायने में उनके लिए बनी योजनाओं पर अमल भी होगा..?