जीवन में अशिक्षा का अंधेरा है। इस अंधेरे को तालीम के सहारे उजियारे में बदलने के लिए आजाद फाउंडेशन फिक्रमंद है। बिना सरकारी इमदाद के मलिन बस्ती के 48 बच्चे अलग-अलग स्कूलों में पढ़ रहे हैं, जिनकी फीस फाउंडेशन और दान दाताओं की मदद से जमा की जाती है।
फाउंडेशन ने गाजीपुर, बनारस, संभल, कासगंज, साकेत (दिल्ली), बदायूं, संभल में एक-एक मलिन बस्ती को पढ़ाने के लिए गोद ले रखा है।
फाउंडेशन की सचिव शाजिया सिद्दीकी के मुताबिक, बीते दो वर्षों से कोरोना महामारी में आर्थिक तंगी के चलते एएमयू के आईजी हॉल के पास की मलिन बस्ती में बच्चों का स्कूल जाने का रास्ता बंद हो गया। फाउंडेशन ने वर्ष 2018 में इस मलिन बस्ती को गोद लिया था, जहां फाउंडेशन की शाजिया सिद्दीकी, डॉ. लम्मन समी, कमांडेंट इमरान खान, डॉ. मीना बंसल, डॉ. जुनैद आलम, सैयद बिलाल, निजदा, मरियम नदीम, दानिश खान ने इन बच्चों को पढ़ाना शुरू किया। फाउंडेशन इस बस्ती में साफ-सफाई भी कराती है। फाउंडेशन के सदस्य शाम चार से छह बजे तक मलिन बस्ती के सभी बच्चों को पढ़ाते हैं। नववर्ष पर मलिन बस्ती में विधि मंत्रालय भारत सरकार के आईसीएएल अधिकारी अरीब अहमद अंसारी व उनकी पत्नी काशीबा पहुंचीं, जहां बच्चों को पढ़ते देखा। अरीब अहमद ने पांच बच्चों की पढ़ाई लिखाई की जिम्मेदारी ली है। इनके अलावा लताफत रजा ने भी दो बच्चों को गोद लिया है। इस अवसर पर शिवानी शर्मा, मिताली बंसल, स्नेहा गौतम, सत्यम, कौशल, फाउंडेशन की अध्यक्ष शाहनीला, सचिव शाजिया सिद्दीकी, उबैद इसरार, भूरा खान, एलिजा, मरियम आदि मौजूद रहे।