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औलाद ने दुत्कारा, कानून बना सहारा

Sun, 20 Aug 2017 02:15 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
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बुजुर्ग रतनलाल वार्ष्णेय अपनी पत्नी रामश्री के साथ। - फोटो : अमर उजाला
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आशीष श्रीवास्तव 
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95 साल के गूंगे-बहरे जिस दंपति को बेटे ने 10 साल पहले बेघर कर दिया था, माता-पिता, भरण-पोषण कानून उनका सहारा बन गया। इस कानून के तहत कार्रवाई करते हुए एसडीएम ने उन्हें शनिवार को घर के भू-तल पर कब्जा दिला दिया। इस मामले में दूसरे पक्ष को सुनवाई के लिए 24 अगस्त की तारीख मुकर्रर की गई है।

 बैंक कालोनी प्रीमियर नगर के रहने वालेे 95 साल के गूंगे बहरे रतन लाल वार्ष्णेय और उनकी पत्नी रामश्री देवी जीवन की सांझ मे किसी और नहीं अपने ही बेटे की यातना का शिकार बने हैं। उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें इस कदर दुर्दिन देखने को मिलेंगे।
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उनके बड़े बेटे ने घर छीनने के अलावा इस कदर बुरा सलूक किया कि मानवता भी शर्मसार हो जाए। बेटे से आजिज आए बुजुर्ग दंपत्ति ने अपने ही मकान में आश्रय पाने के लिए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री एवं मानवाधिकार आयोग तक में गुहार लगाई, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। हारकर उन्होंने सिविल कोर्ट में वाद दाखिल किया था। एसडीएम कोल के यहां भी प्रार्थनापत्र दिया था।

एसडीएम कोल डा. पंकज वर्मा ने कर्तव्य परायणता की अनूठी मिसाल पेश की। उन्होंने माता-पिता भरण-पोषण अधिनियम के आधार पर न केवल बुजुर्गों को उनके मकान में रहने के आदेश किए, बल्कि पुलिस की मदद से शनिवार सायं कब्जा भी दिला दिया। अपने आदेश में उन्होंने बुजुर्ग दंपत्ति को मकान के नीचे वाले तल में एक कमरा, किचन, एक हाल व लैट्रिन बाथरूम देने को कहा है।
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 एसडीएम कोल डॉ. पंकज वर्मा ने बताया कि इस मामले में आरोपी प्रमोद के पेशे से अधिवक्ता साले ने अर्जी देकर स्थगन आदेश देने की मांग की थी। लेकिन मैंने उसे स्वीकार नहीं किया। अधिनियम में जगह दिलाने के साथ हर्जाने का भी प्रावधान है। इसके लिए दूसरे पक्ष को भी सुनना जरूरी है। इसके लिए 24 अगस्त की तारीख मुकर्रर की गई है।
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