गेस्ट हाउस किराये और बिजली बिल में दोहरी भुगतान की स्थिति सामने आई, जबकि 2014 से किराये में बिजली शामिल थी। कर्मचारियों द्वारा टीए/डीए लेने के बावजूद यूनिवर्सिटी द्वारा किराया और होटल भुगतान किए जाने से लगभग 11.56 लाख रुपये का अतिरिक्त भार पड़ा। बिना स्वीकृति वाहनों के किराये पर 16.26 लाख रुपये खर्च हुए, जबकि निदेशकों ने साथ में ट्रांसपोर्ट अलाउंस भी लिया। बैंक से 16,10,823 रुपये नकद निकासी कर भुगतान किए गए, टीडीएस लागू नहीं किया गया।
बैंक ब्याज मद से 2,80,819 रुपये बिना अनुमति खर्च कर दिए गए। 1.50 लाख रुपये के अग्रिम बिल समायोजित नहीं हुए। बिजली बिल देरी से जमा होने पर 50,654 रुपये जुर्माना लगा। ऑडिट रिपोर्ट में स्टॉक रजिस्टर (उत्तर पुस्तिकाएं, उपभोग सामग्री, स्थायी संपत्ति, पुस्तकालय की पुस्तकें) अधूरे या अप्रमाणित पाए गए। ऑडिट में संभावित गबन और संस्थागत स्तर पर वित्तीय नियंत्रण की कमी बताई गई है।
ये हैं जांच टीम में
यूनिवर्सिटी के कुलसचिव प्रो. आसिम जफर के अनुसार मामले में कुलपति प्रो. नईमा खातून ने जांच टीम गठित की है। टीम के चेयरमैन हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. अब्दुल अलीम और सदस्य गणित विभाग के सेवानिवृत्त प्रो. मोहम्मद अशरफ बनाए गए हैं। टीम को निर्देशित किया गया है कि वह कुल वित्तीय नुकसान का आकलन करें ।