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Aligarh Exhibition: कुमार विश्वास की कविता कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है... में झूमे श्रोता

Thu, 22 Feb 2024 04:44 AM IST
चमन शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

कुमार विश्वास, कविता तिवारी, सुदीप भोला और रमेश मुस्कान अलीगढ़ के नुमाइश में आए। सभी ने श्रोताओं को अपनी रचनाओं से से खूब हंसाया। कुमार विश्वास की कविता कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है... कविता पढ़ी तो लोगों में जबरदस्त उत्साह दिखा। श्रोताओं ने उन पर जी भर के प्यार लुटाया।
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अलीगढ़ नुमाइश में कवि कुमार विश्वास कविता पाठ करते हुए - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अलीगढ़ की राजकीय औद्योगिक एवं कृषि प्रदर्शनी में प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने 21 फरवरी को कोहिनूर मंच पर मौजूद श्रोताओं को अपने गीतों से देर रात तक झुमाया। काव्य रस की सजी महफिल का संचालन करते हुए उन्होंने अपने नज्मों, चुटकुलों एवं रोमांटिक शायरी के माध्यम से लोगों को खूब हंसाया। कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है... कविता पढ़ी तो लोगों में जबरदस्त उत्साह दिखा। श्रोताओं ने उन पर जी भर के प्यार लुटाया। इसके बाद उन्होंने देश पर मर मिटने वाले शहीदों को समर्पित कविता सुनाई। प्रेम से जुड़े कई मुक्तक सुनाकर श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। 

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कुमार विश्वास ने प्रदेश की राजनीति पर कटाक्ष किए। कविताओं की प्रस्तुति के दौरान मंच पर जब डॉ. कुमार विश्वास ने अपने चिरपरिचित अंदाज में राजनीतिक और सामाजिक विसंगतियों के विषय में अपना शब्द विन्यास प्रस्तुत किया तो कोहिनूर पंडाल तालियों से गूंज उठा। श्रोता अपने चहेते कवि की एक झलक पाने के लिए बार-बार अपनी कुर्सियों से उठ जा रहे थे। डॉ. कुमार विश्वास के निशाने पर विपक्षी राजनीतिक दलों के साथ-साथ सत्ताधारी पार्टी और उसके नेता भी आ गए। 

कुमार विश्वास ने मंच पर आते ही पद्मभूषण गोपालदास नीरज को याद किया। इसके साथ ही रविंद्र भ्रमर, सुरेंद्र सुकुमार, प्रेम किशोर पटाखा, शहरयार, निर्भय हाथरसी आदि कवियों व साहित्यकारों को याद करते हुए कहा कि उनके लिए अलीगढ़ हमेशा ही पूज्यनीय धरती रहा है। यहां शिक्षा का तीर्थ अलीगढ़ मुस्लिम यूनीवर्सिटी भी है। उन्होंने नुमाइश से जुड़ी पुरानी यादों को ताजा करते हुए कहा कि वे चूंकि पड़ोसी जनपद बुलंदशहर के रहने वाले हैं और वे बचपन से लेकर पढ़ाई करने तक कई बार यहां आकर नुमाइश को देखने आ चुके हैं। उन्होंने बताया कि वे पिछले 36 साल से काव्यपाठ कर रहे हैं। 1996-97 में जब वे नुमाइश में आते थे तब काव्य के बड़े हस्ताक्षर मंच पर होते थे। कवियों को प्रशासन की ओर से हिदायत भी मिलती थी कि किस कविता को पढ़ा जाएगा किसे नहीं पढ़ा जाएगा।  
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काव्य सम्मेलन का शुभारंभ ओज की कवयित्री कविता तिवारी ने कविता कला का यश गान होता रहे शब्द राशि प्रखर कर दे .. सुनाकर मां शारदे का गुणगान किया। प्रयागराज विश्वविद्यालय में कानून के प्रोफेसर श्लेष गौतम ने तबीयत ये टनाटन है टनाटन ही रहेगी, पावन सदा थी भावना पावन ही रहेगी, पहचान अपनी एक ये भारत की संस्कृति सदियों से सनातन हैं सनातन ही रहेगी.., दुर्गा है काली है भवानी सी हैं बेटिया, राधा सी मीरा मां सी हैं बेटियां, हौंसले की कहानी हैं बेटियां..., त्याग की वो कमाई हमें चाहिए, पुरखों ने जो निभायी वो हमें चाहिए, राम घर-घर में हों प्रार्थना है मगर, एक भरत जैसा भाई हमें चाहिए...,  झीण हो चुकी काया को भी चलते देखा है..., कोई धन के लिए कोई मन कोई जीता है बस तन बदन के लिए याद रखती है दुनियां बस जान दे दे वतन के लिए..., याद आती है अभी.. सुनाकर श्रोता का भरपूर मनोरंजन किया। 

सुदीप भोला ने व्यंग्यात्मक लहजे से श्रोताओं को खूब हंसाया। कवि सुदीप भोला ने अपने हास्य व्यंग्य से श्रोताओं को गुदगुदाया। उन्होंने राजनीतिक घटनाक्रम पर भी हास्य के जरिये व्यंग्य किया। उन्होंने लालटेन वा बुझ गया..., साइकिल धड़ाम पहिया तेरा टूटा बाबा का नाम छाया बाबा का नाम... यूपी बाबा की फेन..., मोदी बोले कैम छे, राहुल बोले शेम छे..., सिया संग राम पधारे हैं अवधपुरी में देखो सालिगराम पधारे हैं.., बन गया मंदिर परमानेंट ...सुनाकर धार्मिक माहौल पैदा किया। हास्य की फुहार छूटने के बाद माइक पर ओज कवयित्री कविता तिवारी आईं और उन्होंने ओज कविता से अपनी काव्यपाठ का आगाज किया। किसी को शह दिया उसने किसी को मात दे दी है, विधाता ने सभी को कुछ न कुछ बात दे दी है..., अगर माटी के पुतले देह में ईमान जिंदा हैं..., मैं भारत वर्ष की बेटी हूं डर नहीं सकती ..., इसीलिए राम धरा पर आना बहुत जरूरी है..., फहराए तिरंगा अंबर तक, मां का धानी परिधान रहे, कविता चाहेगी धरती पर, संस्कृतियों का सम्मान रहे। आगरा से आए हास्य व्यंग के कवि रमेश मुस्कान ने सुनाया मोहब्बत सिर्फ खर्चों की बड़ी लंबी कहानी है कभी पिक्चर दिखानी है कभी साड़ी दिलानी है..., गुलामी में जिएंगे... सुनाया। 

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सुपर स्टार कवि थे, हैं और रहेंगे नीरज 

डॉ. कुमार विश्वास ने मंच पर आते ही सुनाया कि तुझी से शाम हो जाना, तुझी में भोर हो जाना...,  उन्होंने कहा कि यह उत्तर प्रदेश पुलिस का ही कमाल है कि अगर हाथ में अत्याधुनिक हथियार न भी हो तो मुंह से ही ठाएं ठाएं की आवाज निकाल कर अपराधी को दहशत में कर देते हैं। बदले में अपराधी भी व्हाट्सएप पर मैसेज भेज देता है अब हम मर गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कमाल के आदमी हैं। उन्होंने देश के सांसद तो छोड़ दो उन्होंने लक्ष्यदीप गए कुर्सी बिछायी और मालदीप डुबो दिया। उन्होंने कहा कि वे चार-पांच साल बाद अब नुमाइश में आए थे। यह नीरज का शहर है। कवि सम्मेलन में न कोई सुपर स्टार था है और न रहेगा। सही मायने में महाकवि नीरज ही सुपर स्टार कवि हैं। किसी की दिल की मायूसी, हमारी सारी चालाकी वहीं पर खो के गुजरी है..., हवाओं के इशारे पर अधूरा अनसुना ही रह गया प्यार का किस्सा.. सुनाया।

डॉ. कुमार विश्वास ने कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है, मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है..., उन्होंने अपनी पंक्तियां पढ़ी तो पांडाल में बैठे दर्शक झूम उठे। उन्होंने कहा कि इस बार बुलाओ तो कवि सम्मेलन के लिए मत बुलाना, तीन-चार दिन की रामकथा कराना।  उन्होंने अयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा का जिक्र किया तो पांडाल ने जयश्री राम के नारे से गूंज उठा। केवल नाम तुम्हारा जपना..., चलो अब लौट चलें रघुराई ...इसे सुनकर पूरा पंडाल तालियों से गूंज उठा। इसके बाद डॉ. कुमार विश्वास ने किसी के दिल की मायूसी जहां से होकर गुजरी है, कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है.. आदि एक से बढ़कर एक पंक्तियां, गीत व मुक्तक सुनाकर पूरी महफिल अपने नाम कर ली। 

अलीगढ़ में कोई उपद्रव समझो सांसद ने बयान दिया है
कुमार विश्वास ने अपने व्यंग के निशाने पर सांसद सतीश गौतम व महापौर प्रशांत सिंघल को भी ले लिया। उन्होंने कहा कि जब भी वह टीवी पर अलीगढ़ के संबंध में कोई उपद्रव पूर्ण बयान या स्थिति को देखते हैं तो समझ जाते हैं कि सतीश गौतम ने कुछ किया होगा। कुमार के इस अंदाज का सांसद समेत वहां मौजूद सभी अधिकारियों और जनता के लोगों ने खूब आनंद उठाया। उन्होंने कहा कि सांसद ने मंच पर एक ही शॉल उड़ायी है। अगली बार जीतेंगे तो शॉल और लेकर आएंगे। कुमार विश्वास ने महापौर पर कटाक्ष किया कि आप तो सेठ आदमी हैं कम से कम चार-छह शॉल ले आते। यह महापौर नहीं होते तो दक्षिण में फिल्म के स्टार होते। उन्होंने कटाक्ष कि मोदी सरकार में सबसे मजे में सांसद हैं। पांच साल में बस एक बार अपना और दूसरा मोदी का फोटो लगाओ चुनाव में जीत पक्की हो जाएगी। उन्होंने यूपी पुलिस को निशाने पर लेते हुए कहा कि यूपी पुलिस बेहद सभ्य है। इतना सम्मान देती है कि अपराधियों को पकड़ने के लिए फॉर्नूचर कार लेकर जाती है। पांडाल में अतिथियों को चाय देने जा रहे कर्मचारियों को रोका तो चुटकी ली कि इन्हें मत रोको भईया न जाने ये भविष्य में क्या बन जाएं। कुमार विश्वास ने कहा कि अब वे विधायकों से खूब गले मिलते हैं पता नहीं कब मुख्यमंत्री बन जाएं।  

कार्यक्रम के पास के लिए लगी रही कतार 
कुमार विश्वास नाइट को लेकर शहर के श्रोताओं में खासी दीवानगी देखने को मिली। उनकी दीवानगी का आलम था कि नुमाइश गेस्ट हाउस के बाहर शाम से ही डॉ. कुमार विश्वास के चाहते श्रोताओं की लंबी कतारें लगी हुई थी। उन्होंने चुटकुलों और रोमांटिक शायरी से खूब गुदगुदाया। देर रात तक श्रोता कुमार विश्वास के गीतों व कविताओं को सुनने के लिए पांडाल में जमे रहे।
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