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सीएएः आखिर कब आ पाएगा शरजील इमाम

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शरजील इमाम - फोटो : CITY OFFICE
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एएमयू बवाल में आरोपी शरजील उस्मानी जमानत पर रिहा होकर अपने घर चला गया। मगर पुलिस अभी इसी बवाल से जुड़े घटनाक्रम के दौरान राष्ट्रद्रोह के आरोपी जेएनयू छात्र शरजील इमाम को अलीगढ़ लाकर कोर्ट में पेश नहीं कर पाई है। लगातार उसे यहां लाने के लिए अदालत स्तर से रिमांडर भेजा जा रहा है। अब दिल्ली की तिहाड़ जेल को ऐसा ही पत्र भेजा गया है।
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वाकये के अनुसार 15 दिसंबर को हुए बवाल के बाद जब एएमयू छात्र सीएए-एनआरसी के विरोध में धरना दे रहे थे, तभी जनवरी माह में जेएनयू छात्र शरजील इमाम धरने में शामिल होकर गया और देश को विभाजित करने संबंधी बयान देकर गया। 25 जनवरी को पुलिस ने राष्ट्रद्रोह का मुकदमा दर्ज किया। इसी तरह के बयान शरजील ने असोम व दिल्ली में भी दिए तो वहां भी मुकदमे दर्ज हुए थे। कई राज्यों की पुलिस उसकी गिरफ्तारी में प्रयासरत रही। इसी क्रम में सबसे पहले दिल्ली पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। तभी से दिल्ली से उसे लाने के प्रयास हो रहे हैं। इसी बीच उसे अपने साथ असोम पुलिस ले गई। असोम भी उसके लिए वी वारंट भेजा गया। मगर, लॉकडाउन लग गया।
लॉकडाउन हटने पर उसे दिल्ली पुलिस फिर अपने साथ ले आई। इस बीच पुलिस ने उसे एएमयू लाने के आरोपी शरजील उस्मानी को गिरफ्तार किया। जो दो दिन पहले जमानत पर रिहा हो गया। मगर शरजील इमाम यहां के मुकदमे में शामिल नहीं हो पाया। इधर, अब सीओ तृतीय अनिल समानिया ने बताया कि तीन दिन पहले फिर दिल्ली तिहाड़ जेल को रिमांडर पत्र अदालत के जरिये भिजवाया गया है। जल्द ही उसे वी वारंट पर लाया जाएगा। यहां के मुकदमे को उस पर तामील कराया जाएगा।
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फरहान जुबेरी की जमानत भरवाई, एक दो दिन में रिहाई
हाईकोर्ट से जमानत पाने के बाद उसकी जमानत भरवाने की औपचारिकताएं बृहस्पतिवार को पूरी की गईं। अधिवक्ता इरफान गाजी के अनुसार हाईकोर्ट के आदेश की प्रति व जमानतनामे स्थानीय अदालत में दाखिल किए गए हैं। अब जमानतियों के सत्यापन आदि की औपचारिकताएं पूरी होने के बाद ही रिहाई होगी। बता दें कि फरहान पर कई मुकदमे थे, जिनमें से एक जिन्ना प्रकरण के दौरान पुलिस पर हमले के मुकदमे में जमानत हाईकोर्ट से हुई है, बाकी में यहीं से जमानत हो गई थी।
जेलों की क्षमता विस्तार करने पर विचार करे सरकार:शरजील उस्मानी
अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में 15 दिसंबर 2019 को हुए बवाल के आरोपी एएमयू के पूर्व छात्र शरजील उस्मानी ने जेल से रिहा होने के बाद जेल में अपने अनुभवों को लेकर अमर उजाला से बातचीत की।
उन्होंने कहा जेल की जेल की बैरक नंबर 12 में ठहरे हुए थे। उसमें अंग्रेजों के जमाने का एक पत्थर लगा हुआ है। उस पत्थर पर लिखा हुआ है कि इस बैरक की लंबाई 120 फीट है और चौड़ाई 36 फीट है। इसमें कैदियों की क्षमता 42 निर्धारित की गई है। लेकिन मौजूदा हालात में वहां 135 बंदी बैरक में घुसे हुए थे। मौजूदा हालात में जहां एक और देश के प्रधानमंत्री सोशल डिस्टेंसिंग की बात कहते हैं, वहीं, जेलों में हालात बदतर हैं। सरकार को चाहिए कि जेलों में क्षमता का विस्तार करें।
उन्होंने कहा जेल प्रशासन के साथ उनका अनुभव बहुत अच्छा रहा और जेल प्रशासन ने उनका बहुत ध्यान भी रखा। इसके साथ ही जेल में बंदियों का व्यवहार उनके साथ ठीक नहीं था। कुछ बंदी उन्हें देखकर चिल्लाने लगे आतंकवादी, आतंकवादी। इसके अलावा जेल में कुछ दबंग किस्म के बंदी जातीय आधार पर भी भेदभाव करते हैं। हालांकि, जेल प्रशासन हर समय जेल के अंदर मौजूद नहीं रह सकता। जिसका फायदा यह इस प्रकार के तत्व उठाते हैं। उन्होंने कहा कि न्यायालय के आदेश के बाद भी कुछ नियमों के चलते उन्हें 8 अगस्त को परीक्षा से वंचित रहना पड़ा है। जिसके बारे में अपने अधिवक्ता से राय ले रहे हैं।
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