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Aligarh News: तीन डॉक्टरों के सहारे अतरौली का 100 शैय्या संयुक्त अस्पताल

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अतरौली में इमरजेंसी में बालक को देखते फार्मासिस्ट। संवाद - फोटो : samvad
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100 शैय्या युक्त संयुक्त चिकित्सालय में डॉक्टरों की कमी से इमरजेंसी सेवाएं बदहाल हैं। महज तीन डॉक्टरों के सहारे चल रहे अस्पताल में इमरजेंसी सेवा पूरी तरह से फार्मासिस्ट संभाल रहे हैं, जबकि जरूरत 16 चिकित्सकों की है। आलम यह है कि रोस्टर के अनुसार भी मरीजों को चिकित्सा सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। यह अस्पताल रेफरल अस्पताल बनकर रह गया है।
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अस्पताल की व्यवस्थाओं के अनुसार जो रोस्टर बनाया गया है उसके तहत ओपीडी और इमरजेंसी सेवाएं चलाने के लिए इमरजेंसी में एक चिकित्सक की 24 घंटे डयूटी रहती है। इसके बाद दूसरे डॉक्टर की तैनाती रहती है, लेकिन रविवार को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर चल रहे मेला में डॉक्टरों की ड्यूटी लग जाने से 100 शैया अस्पताल में छह घंटे तक इमरजेंसी सेवा रामभरोसे रही। फार्मासिस्ट ही मरीजों को देखते हुए नजर आए।
सूत्रों के अनुसार, कोई बड़ा केस आने पर कॉल करके चिकित्सकों को बुलाया जाता है। फिलहाल एक चिकित्सक का तबादला हो गया है एक चिकित्सक नियमित ड्यूटी पर नहीं हैं। इमरजेंसी में एक्सीडेंट, उल्टी, दस्त, बुखार और पेट दर्द के मरीज घंटों इंतजार करते देखे जा सकते हैं। मरीजों को पंडित दीनदयाल उपाध्याय संयुक्त चिकित्सालय अथवा जेएन मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया जाता है।
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रेफरल सेंटर बनकर रह गया है अस्पताल
गांव मैंमड़ी निवासी बसपा नेता मनोज लोधी का कहना है कि क्षेत्रीय जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा देने के लिए सरकार ने 100 शैया का संयुक्त चिकित्सालय बनवाया था, लेकिन डॉक्टर, नर्स और पैरा मेडिकल स्टॉफ की भारी कमी के कारण यह अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। उच्च अधिकारियों को चाहिए कि डॉक्टरों की संख्या बढ़ाई जाए। अनुपस्थित रहने वाले डॉक्टरों पर कार्रवाई हो।
- तीमारदार सुनील ने बताया कि उनके भतीजे की पत्नी दुर्घटना में घायल होने पर इलाज के लिए सरकारी अस्पताल आए थे, लेकिन इमरजेंसी में डॉक्टर नहीं मिले।
- चिकित्सकों की कमी को पूरा करने के लिए डिमांड शासन को भेज दी गई है। फिलहाल अस्पताल में तीन ही डॉक्टर हैं, जिनकी रोस्टर के अनुसार इमरजेंसी में डयूटी रहती है। - डॉ. दुर्गेश कुमार, सीएमएस
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