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साइकिल जगत के 'नक्शे ' में हाशिए पर 'एटलस'

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एटलस साइकिल के साथ एस एस गुप्ता उर्फ चंचल गुप्ता - फोटो : AMAR UJALA
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सोल्डर २०० एटलस साइकिल ही बची जिले के स्टाक में हेडिंग साइकिल जगत के 'नक्शेÓ में हाशिए पर 'एटलसÓ बाक्स विदेशी बनाम स्वदेशी १-अंग्रेजी हुकुमत में रैले, रोबिन हुड, रज, हम्बर नाम के विदेशी ब्रांड  प्रमुख थे, इसीलिए उस वक्त साइकिल सवार बहुत खास होता था। लोग दूर दराज से  इन साइकिलों को देखने आते थे। दहेज में साइकिल एक बड़ा तोहफा था। २-आजादी के बाद पचास-साठ के दशक में स्वदेश निर्मित बांबे हिंद, एवन,  ईस्टर्न स्टार या एटलस और इसके बाद हीरो साइकिल  बाजार में उतरी। इसके बाद  हरक्यूलस, बीएसए, नोवा, टेंड्र और नीलम सहित कई दूसरे ब्रांड भी बने। अलीगढ़ में साइकिल १-आजादी के पहले ही अलीगढ़ में साइकिलें आना शुरू हो चुकीं थीं, शौकीन रईस लोग इस पर घूमते थे। २-१९७२-७४ धनजीत वाड्रा की एक्सपोर्ट फर्म 'एलन एंड एलवनÓ ने कारीगरों को  एटलस साइकिलें दी थी। ३-२०० एटलस साइकिल ही अब अलीगढ़ के स्टाक में, इसके बाद नहीं मिलेगा ये  स्वदेशी चर्चित ब्रांड। ४-मशहूर इतिहासकार प्रो. इरफान हबीब आज भी अपनी साइकिल के साथ चलने के लिए  खासे मशहूर हैं। ५-वर्ष २००६ में अलीगढ़ साइकिल डीलर्स एसोसिएशन भंग हुई, २०१० से कारोबार  में गिरावट की शुरूआत। ६-एक साइकिल में लगभग ७४ छोटे बड़े पुर्जे होते हैं, दुकानों में देने से  पहले उसको एसेंबल किया जाता हैं। ७-२२ से २४ इंची ऊंचाई की सामान्य साइकिल की कीमत इस वक्त लगभग ३५०० से  ३६०० रुपये तक है। ८-बीती २५ मार्च में हुए लॉकडाउन के बाद अलीगढ़ में एटलस के किसी आर्डर का  माल नहीं आ सका है। ९-जिले में लगभग १३० साइकिल की दुकानें संचालित, वर्तमान में रोजाना लगभग  ३०० साइकिलों की बिक्री। १०-एक दशक पहले तक रोजाना ३५००-४००० साइकिलों की बिक्री होती थी, अब मांग  दस फीसदी रह गई। --------- आशीष निगम अलीगढ़। बहुत कम ऐसे लोग हैं, जिन्होंने जिंदगी में कभी साइकिल पर पैडल न  मारा हो। कहना गलत नहीं होगा कि आज भी वाहन चलाने की शुरुआत साइकिल से ही  होती है। आज कल साइकिल 'एटलसÓ के कारण चर्चा में है। जिसकी देश भर संचालित  तीन बड़ी फैक्ट्रियां बंद हो चुकी हैं। उत्पादन बंद होने के कारण अलीगढ़  में बीती २५ मार्च से एटलस की कोई आपूर्ति नहीं हो रही है जबकि अलीगढ़ में  इसकी खासी डिमांड रहती है। आज भी इस नामीगिरामी ब्रांड को लोग खरीदना और  चलाना पसंद करते हैं। वजह दशकों पुराना भरोसा है, लेकिन अब ग्राहकों को ये  मनपंसद साइकिल कुछ दिनों बाद शायद कभी नहीं मिल पाएगी.. क्योंकि अलीगढ़ में  केवल २०० एटलस साइकिलों का स्टाक बचा है। एटलस के बंद होने की वजहों पर  पूरे देश में बहस चल रही है, लेकिन क्या ये साइकिल फिर से अपने 'पहियोंÓ पर  घूम पाएगी ये कहना अभी जल्दबाजी होगी। बयान-- मेरे बाबा स्व. विशंभर दयाल गुप्ता ने अतरौली में साइकिल स्टोर खोला था,  जिसमें विदेश से आयतित रैले, रोबिन हुड, रज, हम्बर नाम की साइकिलें बेची  जाती थीं। इसके बाद स्वदेश निर्मित बांबे हिंद, एवन, ईस्टर्न स्टार या एटलस  और हीरो साइकिल आयी। कारोबार बढऩे पर हमने अलीगढ़ में रेलवे रोड में गुप्ता  साइकिल स्टोर खोला, जो साठ साल पुराना है। अतरौली का स्टोर ९० वर्ष पुराना  है। वर्ष २०१० के बाद से इसकी मांग में कमी आई। एक जमाने में एटलस की बहुत  मांग थी, अभी तक रही है, लेकिन आर्डर के अनुसार सप्लाई नहीं दे पाने में  कंपनी फेल हो गई। अब जिले में लगभग २०० साइकिलों का स्टाक बचा होगा। इसके  बाद ये साइकिल शायद किसी दुकान पर न दिखे। एसएस गुप्ता उर्फ चंचल गुप्ता, गुप्ता साइकिल कंपनी, जापान बिल्डिंग रेलवे रोड। --------- हमनें एटलस साइकिल बहुत चलाई। कक्षा छह से चलाना शुरू किया था। आज एक नई  साइकिल ले जा रहे हैं। जो नई डिजाइन की हैं, क्योंकि साइकिल चलाने में मजा  आता है और इससे शरीर का पूरा व्यायाम होता है। -गौरव गुप्ता, चंडौस। ---------- एटलस की मांग बहुत रहती थी, अब भी लोग इस मजबूत साइकिल पर भरोसा करते हैं,  लेकिन अब माल नहीं मिल पा रहा है, जिसके कारण ग्राहकों को दूसरे ब्रांड लेने पड़ रहे हैं। बालेंद्र गुप्ता, अतरौली, गुप्ता साइकिल स्टोर संचालक। --------- मेरे दादा की शादी में एटलस साइकिल मिली थी, जिसको देखने के लिए लोग घर पर  आते थे। मेरे पिता जी भी साइकिल के शौकीन थे, और मैं खुद। दादा की साइकिल  को हमनें वर्षों संभाल कर रखा। मास्टर ओम प्रकाश, रेलवे रोड व्यापारी नेता।
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रेलवे रोड पर साइकिल खरीदने आए चंडौस के गौरव गुप्ता - फोटो : AMAR UJALA
रेलवे रोड पर साइकिल खरीदने आए चंडौस के गौरव गुप्ता
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बालेंद्र गुप्ता ..गुप्ता साइकिल स्टोर अतरौली - फोटो : AMAR UJALA
बालेंद्र गुप्ता ..गुप्ता साइकिल स्टोर अतरौली
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