मशहूर गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। एएमयू के शहरयार की गजलों को फिल्म उमराव जान में आशा भोसले ने आवाज दी। इस फिल्म के गीत आज भी मन को मोह लेते हैं।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के उर्दू विभाग के पूर्व प्रोफेसर और मशहूर शायर शहरयार की गजलों ने हिंदी सिनेमा में भी अपनी अमिट छाप छोड़ी है। खास तौर पर फिल्म उमराव जान में उनकी लिखी गजलों को जब आशा भोसले ने अपनी मधुर आवाज दी, तो वे हमेशा के लिए अमर हो गईं।
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फिल्म में “दिल चीज क्या है…”, “इन आंखों की मस्ती के मस्ताने हजारों हैं” और “जुस्तजू जिसकी थी…” जैसी गजलों ने श्रोताओं के दिलों में खास जगह बनाई। इन गजलों को रेखा पर फिल्माया गया, जबकि संगीतकार खय्याम के संगीत ने उन्हें और भी यादगार बना दिया।
शहरयार की शायरी में मोहब्बत, दर्द और तहज़ीब की गहराई साफ झलकती है। उनकी रचनाएं न केवल साहित्य जगत में बल्कि फिल्मी दुनिया में भी आज तक सराही जाती हैं। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से जुड़े होने के कारण शहरयार का इस शहर से गहरा नाता रहा है। उनकी ग़ज़लों की लोकप्रियता आज भी कायम है और नई पीढ़ी के बीच भी उतनी ही पसंद की जाती है, जितनी पहले थी।