ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद असदुद्दीन ओवैसी, सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद व संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क एएमयू छात्रों के समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की मांगों को जायज बताया है।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) में शुल्क वृद्धि के विरोध में आंदोलन कर रहे छात्र-छात्राओं को जनप्रतिनिधियों का समर्थन मिल रहा है। 10 अगस्त को ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सांसद असदुद्दीन ओवैसी, सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद व संभल के सांसद जियाउर्रहमान बर्क भी उनके समर्थन में उतर आए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों की मांगों को जायज बताया है।
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शुल्क वृद्धि वापस हो : ओवैसी
असदुद्दीन ओवैसी ने अपने एक्स हैंडल पर लिखा है कि वह अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के विद्यार्थियों की एकजुटता के साथ हैं। यूनिवर्सिटी को अपनी शुल्क वृद्धि जल्द से जल्द वापस लेनी चाहिए। एएमयू के सैकड़ों विद्यार्थी पिछड़े इलाकों और बेहद गरीब परिवारों से आते हैं। उनके लिए 35-40 फीसदी की बढ़ोतरी असहनीय है।
छात्रों पर बल प्रयोग और उत्पीड़न चिंताजनक : जियाउर्रहमान
संभल के सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने एएमयू की कुलपति प्रो. नईमा खातून को पत्र भेजकर शुल्क वृद्धि और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग, हिरासत और उत्पीड़न पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि ऐसी कार्रवाई सर सैयद अहमद खान के किफायती शिक्षा के दृष्टिकोण को कमजोर करती है और लोकतांत्रिक अधिकारों का उल्लंघन करती है। शुल्क वृद्धि की समीक्षा की जाए। बल प्रयोग की जांच और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। छात्रों के शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा की जाए।
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एएमयू में हिंसा और धमकी परेशान कर रही : इमरान
सहारनपुर के कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने कुलपति को पत्र भेजकर छात्रों के विरुद्ध हिंसा और धमकी पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि शुल्क वृद्धि ने विद्यार्थियों पर अनुचित वित्तीय बोझ डाला है। कई विद्यार्थी आर्थिक रूप से वंचित और हाशिए पर खड़े समुदायों से आते हैं। पारदर्शी परामर्श या पर्याप्त औचित्य के बिना लागू की गई यह भारी वृद्धि अल्पसंख्यक विद्यार्थियों को सुलभ शिक्षा प्रदान करने के एएमयू के मिशन को कमजोर करने का खतरा पैदा करती है। 2019 से छात्र संघ के अभाव ने छात्रों को अपनी शिकायतें व्यक्त करने के लिए एक मंच से वंचित कर दिया है, जिससे उनके बहिष्कार और हताशा की भावना और बढ़ गई है।