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गर्मी बढ़ते ही बढ़ी दूध की किल्लत

Mon, 22 May 2017 01:23 AM IST
अमर उजाला ब्यूूराे
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synthetic milk, mewat - फोटो : अमर उजाला
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गर्मी की तपिश बढ़ते ही जनपद में दूध की किल्लत शुरू हो गई है। जानकारों की मानें तो पिछले माह की तुलना में दूध के उत्पादन में 30 फीसदी की गिरावट आई है। गिरावट का यह क्रम जारी रहने के आसार हैं। दुग्ध उत्पादन सोसाइटियों द्वारा दूध पर डेढ़ रुपये प्रति लीटर का इजाफा किए जाने के परिणामस्वरूप सरकारी पराग डेयरी ने भी फुटकर दूध के दाम में एक रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया है। पिछले सप्ताह तक 44 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से मिलने वाला दूध अब 45 रुपये प्रति लीटर मिल रहा है। हालांकि बाजारों में दूध के दाम फिलहाल स्थिर बने हुए हैं, लेकिन उत्पादन के मुकाबले डिमांड में हुई बढ़ोत्तरी के चलते जल्द ही दाम बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
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गर्मी बढ़ते ही मांग हुई दोगुनी
अलीगढ़। गर्मी बढ़ने के साथ ही गर्मी स्पेशल आइटम लस्सी, मिल्क शेक, छाछ, दही समेत अन्य आइटमों की डिमांड बढ़ गई है। रही सही कसर सहालग के मौसम ने पूरी कर दी है। इसके चलते आम दिनों में दूध की खपत पांच लाख लीटर से बढ़कर सात-आठ लाख लीटर तक पहुंच गई है, जबकि इसके सापेक्ष जनपद में घटकर करीब सवा पांच लाख लीटर रह गया है। बताते चलें कि आम दिनों विशेषकर सर्दियों में जनपद में छह से आठ लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है।
- दूध के उत्पादन में पिछले एक माह में बड़ी गिरावट आई है। पराग डेयरी को एक डेढ़ माह पहले तक करीब चार हजार लीटर प्रतिदिन दूध मिल जाता था। अब मात्र 2500 लीटर प्रतिदिन दूध मिल पा रहा है। सोसाइटियों ने इसके कारण छह मई से दूध के रेट डेढ़ रुपया बढ़ा दिए हैं। मजबूरन डेयरी प्रबंधन को एक रुपये प्रति लीटर के हिसाब से दाम बढ़ाने पड़े हैं।
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- जेपी गोस्वामी, विपणन प्रभारी पराग डेयरी
- गर्मियों में दूध की डिमांड बढ़ गई है। इसके मुकाबले दूध के उत्पादन में करीब 30 फीसदी की गिरावट आई है। इसका असर बाजार पर पड़ रहा है। जुलाई में बरसात का मौसम आने के बाद स्थिति में सुधार होगा।
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-राजीव ख्यालीराम, दुग्ध विक्रेता संघ के अध्यक्ष
दूध की किल्लत के प्रमुख कारण
-    अप्रैल के बाद हरा चारा खत्म, जुलाई तक चलेगी समस्या,
-    गर्मी और लू की वजह से पशुओं का दूध हो जाता है कम
-    दुधारू पशुओं के गर्भाधान की संभावना हो जाती है नगण्य
-    सर्दियों में बच्चा देने के बाद छह सात माह तक ही देती है दूध
-    उसके बाद दूध देने की क्षमता अपने आप ही हो जाती है कम 
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