अलीगढ़ में बिक रहा था 300 रुपये किलो देसी घी
पिछले एक वर्ष में एफडीए ने पांच बड़ी कार्रवाई मिलावटी या सिंथेटिक देसी घी पर की हैं। इनमें पहली कार्रवाई गंगीरी में हुई थी। उस समय खुलासा हुआ था कि ब्रांडेड कंपनियों के नाम से अर्क की मिलावट से घी तैयार कर उसे 300 रुपये प्रतिकिलोग्राम की दर से बेचा जा रहा था। इसके अलावा खैर, गोंडा, हरदुआगंज व हाल में इगलास में भी इसी तरह का भंडाफोड़ किया है। ये सभी दूसरे राज्यों से मिलावटी माल लाकर यहां ब्रांडेड कंपनियों की पैकिंग में बेच रहे थे। महावीरगंज में भी एक मर्तबा तिल के तेल की मिलावट वाला देसी घी पकड़ा गया था, जिसे पूजा के लिए इस्तेमाल होने वाला घी बताकर बेचा जा रहा था।
ऐसे बन रहा सिंथेटिक घी
सूत्रों के अनुसार रिफाइंड, वनस्पति घी, तिल का तेल आदि मिलाकर देसी घी तैयार किया जाता है, जिसमें 4000 रुपये प्रति किलो मिलने वाले घी के अर्क को 10 ग्राम मिलाकर 15 किलो देसी घी तैयार किया जाता है। इसे बाद में अलग-अलग ब्रांडों के नाम से बेचा जाता है। पूर्व में गंगीरी सहित पांच स्थानों पर पकड़े गए घी के नमूनों की जांच में इसका खुलासा हुआ था।
असली घी की लागत का गणित
ब्रांड नाम से पैकिंग में बेचने वाली अधिकतर कंपनियां दूध से क्रीम से घी बनाकर बेचती हैं। इसकी कीमत 800 रुपये से 1000 रुपये किलो तक रही है। खुले में घी बेचने वाले दुकानदार या फड़िहा गंगा सहारे की पट्टी के पशु उत्पादकों से कच्चा घी या परंपरागत नौनी घी खरीदते हैं। उससे देसी घी तैयार किया जाता है। इसकी कीमत 1200 रुपये किलो से 1500 या उच्च गुणवत्ता वाले की 1800 रुपये किलो तक रहती है।
लागत से कम है दाम तो गुणवत्ता पर उठेंगे ही सवाल
- 15 से 20 लीटर दूध से बनता है करीब एक किलो देसी घी
- 2 से ढाई किलो क्रीम से एक किलो देसी घी बनाने का औसत
- 600 से 700 रुपये किलो थोक में एक किलो घी की लागत