शहर के बड़े अपार्टमेंट में कम लोड वाले ट्रांसफार्मर की स्वीकृत कर विद्युत विभाग को लाखों का चूना लगाने का खुलासा हुआ है। विभागीय अवर अभियंता और उप खंड अधिकारी ही लंबे समय से यह खेल कर रहे थे। मुख्य अभियंता कार्यालय से लेकर एमडी आफिस तक इस खुलासे से हड़कंप मच गया है।
आननफानन में चीफ इंजीनियर ने मामले की गोपनीय जांच शुरू कराई तो दूसरी ओर घपलेबाजी में फंसने वाले विभागीय इंजीनियरों को बचाने के लिए जांच को लटकाने की कोशिशें भी शुरू हो गई हैं। एमडी का कहना है कि चीफ इंजीनियर से पूरा ब्यौरा लिया जाएगा। गड़बड़ी उजागर होती है तो संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई भी होगी।
वहीं इस मामले में जिन अपार्टमेंट का जिक्र है, उनके मालिक दमखम के साथ हर जांच के लिए तैयार हैं। हरकुट ट्रेडर्स नामक फर्म के संचालक गौरव अग्रवाल ने पिछले दिनों जेई, एसडीओ स्तर से हो रहे बड़े खेल का खुलासा किया था। प्रबंध निदेशक आगरा को भेजे गए पत्र में उन्होंने शहर के आठ बड़े अपार्टमेंट की सूची संलग्न कर नियम विरुद्ध कम लोड वाले ट्रांसफार्मर स्वीकृत कर लाखों रुपये डकारने की शिकायत की थी।
आरोप है कि कम लोड वाले ट्रांसफार्मर देकर अधिकारियों ने अपनी जेब भरी तो दूसरी ओर विद्युत विभाग को दोतरफा नुकसान उठाना पड़ रहा है। एक तो निर्धारित क्षमता वाले ट्रांसफार्मर का पूरा राजस्व विभाग में जमा नहीं हुआ, दूसरा कम लोड वाले ट्रांसफार्मर पर अपार्टमेंट में अधिक लोड उपयोग से ट्रांसफार्मर आए दिन फुंक रहे है जिसमें लाखों का नुकसान विभाग को उठाना पड़ रहा है।
आरोप है कि एक अपार्टमेंट की बिना एडीए से स्वीकृत दुकानों में भी विद्युत भार स्वीकृत कर दिया है। इस शिकायत पर मुख्य अभियंता ने अधिशासी अभियंता जेपी वर्मा को जांच सौंपी है।