केंद्र सरकार द्वारा शादी वाले परिवारों को ढाई लाख रुपये दिए जाने की घोषणा हवाई साबित हुई। 17 नवंबर को हुई घोषणा के बाद समूचे जनपद के 33 बैंक और उनकी 200 से अधिक शाखाएं करीब 37 लाख की आबादी वाले जनपद में बमुश्किल दस परिवारों को सहारा दे सकीं, वह भी मात्र एक-एक लाख रुपये का। 21 नवंबर को प्रावधान और जटिल करने के बाद पहले से कैश की कमी से जूझ रहे बैंक शादी वाले एक भी परिवार की चाह कर भी मदद नहीं कर सके। जटिल प्रावधानों को कोई पूरा कर नहीं सका और इस वजह से इस लाभ से वंचित रहा।
आठ नवंबर की सायं 500 एवं 1000 के नोटों की करेंसी पर प्रतिबंध लगाने के बाद सरकार ने बैंक से पहले चार हजार तो बाद में साढ़े चार हजार रुपये निकालने का प्रावधान रखा था। एटीएम से पहले दो हजार और उसके बाद ढाई हजार निकाले जाने का प्रावधान किया गया। इस निर्णय से विशेष रूप से शादी वाले परिवारों में खलबली मची रही। चौतरफा बढ़ते दबाव के बाद आखिरकार 17 नवंबर को सरकार जागी और उसने शादी वाले परिवारों को अधिकतम ढाई लाख रुपये जारी करने के निर्देश बैंकों को जारी कर दिए, लेकिन 21 नवंबर को केंद्र सरकार ने शादी मामले में प्रावधान जटिल करते हुए इन परिवारों के लिए ढाई लाख रुपये तक निकालने के अरमानों को चकनाचूर कर दिया।
लोगों ने रिश्तेदारों की मानमनाैव्वल कर चलाया काम
अलीगढ़। दोदपुर निवासी संदीप अग्रवाल ने बताया कि उसे अपनी बहन की शादी के लिए नाते रिश्तेदारों की मान मनाैव्वल करनी पड़ी। 24 हजार की तय सीमा के अनुसार उसने अपने चाचा, दो भाई एवं एक दूर के रिश्ते की बहन के खाते में पैसा डलवाकर किसी तरह रुपये जुटाए। बाकी बचा पेमेंट वायदों और उधारी के सहारे चला। एडीए निवासी योगेश यादव ने बताया कि उसने तो धनीपुर केनरा बैंक के प्रबंधक से अपने व्यापार की लिमिट के अनुसार पैसा देने की पेशकश की थी। ताकि अपनी बेटी की शादी के लिए इन पैसों का उपयोग कर सकूं। पर उन्होंने इंकार कर दिया।
18 से 21 नवंबर के बीच मात्र दस परिवारों को लाभ
अलीगढ़। 17 नवंबर को हुई शादी वाले परिवारों को ढाई लाख रुपये दिए जाने की घोषणा के बाद 18 नवंबर से बैंकों में आवेदनों की झड़ी लग गई। इस दौरान एसबीआई मुख्य शाखा से ही सात परिवारों को ढाई लाख तो नहीं, बल्कि कैश की कमी का हवाला देते हुए एक-एक लाख देकर एहसान कर दिया। केनरा बैंक समेत अन्य बैंकों को मिलाकर करीब दस परिवार लाभान्वित हो सके। एसबीआई मेन ब्रांच के मुख्य प्रबंधक देवदत्त शर्मा ने स्वीकार किया कि 17 नवंबर के बाद से अब तक महज सात लोन उनकी शाखा में हुए हैं। लीड बैंक प्रबंधक आनंद गर्ग ने माना कि बमुश्किल आठ दस परिवारों को शादी योजना का लाभ मिल सका है।