भीषण गर्मी में पशु-पक्षी भी बेहाल हैं। तापमान के लगातार बढ़ने से जानवर भटक रहे हैं। पानी के लिए कुत्ते-बंदर मोहल्लों की नालियों का सहारा ले रहे हैं। जंगली जानवर भी खेतों और आबादी की ओर रुख कर रहे हैं।
मौसम में बदलाव के साथ अप्रैल माह में तापमान 44 डिग्री पर पहुंच जाने का असर आम जनमानस के साथ पशु-पक्षियों पर भी पड़ा है, गर्मी में वह इधर से उधर भटकते हुए नजर आते हैं। गर्मी और पानी की कमी की वजह से बंदर और कुत्ते आक्रामक हो गए हैं। क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इसका सबसे बड़ा कारण वन क्षेत्र का लगातार कम होते जाना भी है।
पर्यावरण प्रेमी कपिल कुमार, नरेंद्र राजपूत कहते हैं कि वन क्षेत्रों में पेड़ों और वन्यजीवों के लिए पानी की वन विभाग की कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है। प्रशासन की ओर से खुदवाए गए तालाब और नहरें भी सूखी पड़ी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पानी के अभाव में नील गाय, हिरण और अन्य जीव खेतों की ओर आ जाते हैं।
अतरौली और बिजौली के कई हिस्से ‘डार्क जोन’ में
केंद्रीय भूजल बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार अतरौली और बिजौली के कई हिस्से ‘डार्क जोन’में आ चुके हैं। पहले जहां 40-50 फीट पर पानी मिल जाता था, अब बोरिंग 150 से 180 फीट तक करनी पड़ रही है। फजलपुर व उसके आसपास के गांवों में तो 180 फीट पर भी पानी का लेयर नहीं मिल रहा। गांव बहरावद, कासिमपुर, नगला जाट, और सुनहरा के आसपास का क्षेत्र डार्क जोन में हैं। जलस्तर हर साल औसतन एक से 1.5 मीटर नीचे खिसक रहा है।
हर व्यक्ति को पशु-पक्षियों का भी ऐसी गर्मी में ध्यान रखना चाहिए पानी की एक-एक बूंद बचानी होगी।- कपिल गुप्ता, अतरौली।
- वन्य जीव भी बेहद जरूरी हैं। जंगल घट गए तो वन्य जीवों के लिए संकट होगा। वन्य जीवों की सुरक्षा पर भी योजना बने। - अतुल भारद्वाज, हरनोट।