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नाराज सांसद-विधायक दर्शक दीर्घा में बैठे, रही गहमागहमी

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सीडीओ अंकित खंडेलवाल की सांसद सतीश गौतम से होती नोकझोंक। अमर उजाला - फोटो : CITY OFFICE
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योगी सरकार के चार साल पूरे होने पर चार साल बेमिसाल कार्यक्रम में जिला प्रशासन को जनप्रतिनिधियों की नाराजगी झेलनी पड़ी। मंच पर बैठने की व्यवस्था सही न होने पर सांसद, छह विधायक व एमएलसी दर्शक दीर्घा में जाकर बैठ गए। इससे अधिकारियों के हाथ-पांव फूल गए। इस दौरान कुछ देर गहमागहमी भी रही। बाद में जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश राणा और डीएम चंद्रभूषण सिंह के समझाने पर सभी दोबारा मंच पर बैठे। किसी प्रकार के विवाद से बचने के लिए जनप्रतिनिधियों का कहना था कि उन्हें सीएम के संबोधन को देखने-सुनने में असुविधा हो रही थी, इसके चलते नीचे जाकर बैठे थे ताकि कार्यक्रम को अच्छे से देख व सुन सकें।
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नुमाइश के कृष्णांजलि सभागार में शुक्रवार को योगी सरकार के चार साल पूरे होने पर चार साल बेमिसाल कार्यक्रम आयोजन किया गया था। मंच पर जनप्रतिनिधियों के लिए एक तरफ दो सोफे डाले गए। जबकि दूसरी तरफ अधिकारियों के बैठने के लिए सोफे पड़े थे। जनप्रतिनिधियों के सोफों पर कुछ भाजपा कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम शुरू होने के पहले ही कब्जा जमा लिया। जब विधायक संजीव राजा और विधायक अनिल पाराशर पहुंचे तो अधिकारियों ने उनके लिए दो और सोफों की व्यवस्था की। इन सोफों के डाले जाने से मंच के पीछे की दीवार पर प्रोजेक्टर के माध्यम से सीएम के लाइव संबोधन को चलाया जा रहा था, वह ठीक से दिखाई नहीं दे रहा था। इस पर जनप्रतिनिधियों ने नाराजगी जाहिर की।
विधायक संजीव राजा और अनिल पाराशर मंच से उठ गए। उनके साथ सांसद सतीश गौतम, एमएलसी ठा. जयवीर सिंह, विधायक अनूप प्रधान, राजकुमार सहयोगी, रवेंद्र पाल सिंह मंच से उतरकर नीचे दर्शक दीर्घा में जा बैठे। इससे प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। तत्काल सीडीओ अंकित खंडेलवाल, सिटी मजिस्ट्रेट विनीत कुमार सिंह जनप्रतिनिधियों के पास पहुंचे और उनको मंच पर बैठने के लिए मनाने लगे। मगर, उन्होंने मना कर दिया। इस दौरान कुछ गहमागहमी भी हो गई।
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प्रभारी मंत्री ने बुलाया तो दोबारा मंच पर पहुंचे
जनप्रतिनिधियों ने कहा कि उनके लिए मंच पर बैठने का उचित स्थान नहीं है। अधिकारियों ने कहा कि वहां बैठने की पर्याप्त व्यवस्था है। जनप्रतिनिधियों को पूरा सम्मान रखा जा रहा है। काफी देर तक मामला चलता रहा। बाद में डीएम चंद्रभूषण सिंह स्वयं नीचे उतरे और विधायक-सांसदों से मंच पर बैठने का अनुरोध किया। इसी बीच जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश राणा ने मंच से जनप्रतिनिधियों को बुलाया। उनके समझाने पर सभी जनप्रतिनिधि मंच पर पहुंचे। हालांकि, जनप्रतिनिधियों ने विवाद से बचने के लिए नाराजगी से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि उन्हें सीएम का संबोधन सुनना व देखना था, इस लिए वह नीचे जाकर बैठे थे। जिले के प्रभारी मंत्री सुरेश राणा ने भी बाद में यही बात कही। उन्होंने बताया कि सीएम के संबोधन को सुनने के लिए जनप्रतिनिधियों ने मंच से नीचे उतरकर दर्शक दीर्घा में बैठना पसंद किया था। बाद में सभी फिर से मंच पर बैठ गए। इतने बड़े आयोजन में छोटी-छोटी बातों को तूल नहीं देना चाहिए।
कार्यकर्ताओं ने कर लिया था मंच पर कब्जा
मंच पर 12 जनप्रतिनिधियों के बैठने की व्यवस्था की गई थी। कार्यकर्ताओं के लिए दर्शक दीर्घा में कुर्सियां डाली गई थीं। मगर, कुछ कार्यकर्ताओं ने कार्यक्रम में जल्दी पहुंचकर मंच पर कब्जा कर लिया। इससे वहां पर असहजता की स्थिति उत्पन्न हो गई।
मंच पर बैठने के दौरान एलईडी पर चल रहा संबोधन ठीक से सुनाई व दिखाई नहीं दे रहा था। इसलिए मंच से नीचे उतरकर सभी जनप्रतिनिधि दर्शक दीर्घा में बैठ गए थे। अक्सर देखने में आता है कि मुख्यमंत्री की वीसी से लेकर अन्य तरह के आयोजनों में बैठने का इंतजाम सही ढंग से नहीं होता। बाद में प्रभारी मंत्री के हस्तक्षेप पर व्यवस्था होने पर हम लोग मंच पर बैठ गए थे।
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- अनिल पाराशर, कोल विधायक
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