फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

गम और गुस्से के बीच अनम सुपुर्द-ए-खाक

Thu, 18 May 2017 02:24 AM IST
अमर उजाला, अलीगढ़
विज्ञापन
अनम का जनाजा घर पहुंचने पर विलाप करते परिजन। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
एएमयू गर्ल्स स्कूल की छात्रा अनम असलम को शाहजमाल कब्रिस्तान में गम और गुस्से के बीच सुपुर्द-ए-खाक कर दिया गया। गम अनम की मौत का था और गुस्सा आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से था। दिल्ली से शव आने के बाद ऊपरकोट स्थित जामा मस्जिद पर जनाजे की नमाज इमाम जुमा मुफ्ती महमूदुल हसन ने पढ़ाई, जिसमें सैकड़ों लोग शामिल हुए। 
विज्ञापन

दिल्ली एम्स से अनम के शव को शाम साढ़े चार बजे घर लाया गया। इससे पहले ही भीड़ अनम के घर पर पहुंचने लगी थी। शव पहुंचते ही परिवार की महिलाओं, मां व बहनों का हाल बेहाल हो गया। उन्हें संभाल पाना मुश्किल हो रहा था। मगरिब की नमाज के बाद जनाजे की नमाज पढ़ी गई। इसके बाद जनाजा देहली गेट, चरखवालान चौराहा से होते हुए शाहजमाल कब्रिस्तान पहुंचा। 

बता दें कि आठ मई को लाल डिग्गी के पास रोडरेज में चली गोली अनम के सिर में जा धंसी थी। दिल्ली एम्स में मंगलवार को उसकी मौत हो गई थी। परिजन पोस्टमार्टम न कराने की जिद पर अड़े थे और बुधवार दोपहर तक यही प्रयास होते रहे। मगर मसला दिल्ली का होने के कारण अलीगढ़ पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए, तब शव का पोस्टमार्टम कराया गया।
विज्ञापन

एएमयू में शोक की लहर

अनम के इंतकाल पर स्कूल में शोक सभा का आयोजन किया गया। उसकी मगफिरत और परिजनों के सब्र के लिए दुआ की गई। प्रधानाचार्या आमना मलिक, अर्शी जफर खान आदि मौजूद रहीं। उधर, एएमयू गर्ल्स कॉलेज के स्टाफ से एकत्र हुए 40 हजार रुपये अनम के परिजनों को सौंपे गए। एएमयू छात्र संघ अध्यक्ष फैजुल हसन, छात्र नेता अबुल फराह शाजली आदि ने भी गहरा दुख व्यक्त किया। वहीं समाजसेवी गुलजार अहमद ने सरकार से अनम के परिजनों को 20 लाख रुपये देने की मांग की है।

गिरफ्तारी न होने पर आक्रोश
इस मामले में आरोपियों की    गिरफ्तारी न होने पर परिवार व इलाके के लोगों में बुधवार को  खासा आक्रोश दिखाई दिया। लोगों ने कहा कि पुलिस ने समय रहते आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं की, तो इलाके के लोग आंदोलन करेंगे।

एक थी ‘अनम’...
इकराम वारिस
अनम इस दुनिया को छोड़कर जा चुकी है। पर वह अपने पीछे छोड़ गई है तमाम यादें, जो सभी को गम के सागर में डुबो देती हैं। परिजनों के दिल में एक हूक-सी उठती है कि काश उस दिन अनम स्कूल न गई होती। घर में मातम की जगह, उसकी आवाज गूंज रही होती। घर हो या स्कूल, अनम हमेशा डॉक्टर बनने का ख्वाब बुनती रहती थी। आठ मई को सिर में लगी गोली ने उसकी जिंदगी छीन ली। उसकी सहेलियां बस एक ही सवाल पूछ रही थीं, आखिर अनम का कुसूर क्या था? 

अनम की क्लासमेट जैनब सिद्दीकी ने बताया कि अनम पढ़ने में होशियार थी। सबको यकीन था कि वह डॉक्टर बन जाएगी। वो मनहूस दिन आज भी याद है, जब अनम को गोली लगी। उस दिन वह काफी खामोश और गुमसुम थी। मानो उसे किसी अनहोनी का आभास हो गया हो।
कक्षा एक से अनम की क्लासमेट सादिया खान बताती है कि उसकी अनम से ज्यादा बातचीत नहीं थी। मगर वह पढ़ने में अच्छी थी। उसके काम पूरे रहते थे। उसकी हाइट अच्छी थी। इसलिए वह पीछे बैठती थी, लेकिन पढ़ने में वह आगे थी। 

अनम की क्लास टीचर रियाज फातिमा बताती हैं कि अनम के यूं बिछड़ने से सब सदमे में हैं। वह काफी अनुशासित छात्रा थी। 20-25 दिनों में उसकी एक भी शिकायत नहीं आई। वह पढ़ने में जहीन थी। वह अपने ख्वाब को जरूर पूरा कर लेती।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें