धर्मवती देवी सुबह अंगीठी के पास बैठकर हाथ सेंक रही थीं। इसी दौरान उनके कपड़े में आग गई। वृद्धा को जेएन मेडिकल कॉलेज ले गए, लेकिन हालत में सुधार न होने पर वहां से दिल्ली के लिए रेफर कर दिया। रास्ते में वृद्धा की मौत हो गई।
जलाली कस्बे के सिद्धपीठ श्री वनखण्डेश्वर महादेव मंदिर के पुजारी परिवार की वृद्धा 14 दिसंबर सुबह आग की चपेट में आने से बुरी तरह झुलस गईं। उन्हें जेएन मेडिकल कॉलेज ले जाया गया जहां से शाम के समय दिल्ली रेफर कर दिया गया, लेकिन दिल्ली पहुंचने से पहले ही रास्ते में मौत हो गई।
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रामलीला मैदान के पास रहने वाले गोकुल चंद्र गोस्वामी की 75 वर्षीय पत्नी धर्मवती देवी 14 दिसंबर सुबह अंगीठी के पास बैठकर हाथ सेंक रही थीं। इसी दौरान उनके कपड़े में आग गई। उस समय कमरे में कोई नहीं था। आग उनके शरीर के साथ ही नजदीक रखे बिस्तर और चारपाई तक भी पहुंच गई।
बताते हैं कि पूर्व में उनके शरीर को पैरालाइसिस का अटैक पड़ा था, जिसकी वजह से वह ज्यादा चल-फिर नहीं पाती थीं। जिस कमरे में थीं, उसके बाद आंगन और फिर बाहर की ओर कमरे थे, इसलिए उनकी आवाज भी परिजन तक नहीं पहुंची।
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उनके कमरे से धुआं उठता देखकर नातिन पहुंची और चीख-पुकार कर परिवार के अन्य लोगों को बुलाया। परिजन आग बुझाने के साथ ही वृद्धा को जेएन मेडिकल कॉलेज ले गए, लेकिन हालत में सुधार न होने पर वहां से दिल्ली के लिए रेफर कर दिया गया। परिजन उन्हें दिल्ली ले जा रहे थे, लेकिन लालकुआं पहुंचते ही धर्मवती देवी ने दम तोड़ दिया।