जिला उपभोक्ता परितोष आयोग की स्थानीय अदालत ने पैक्ड दूध निर्माता क्षेत्र की नामी फर्म अमूल के उत्पादक व वितरक पर तय कीमत से अधिक मूल्य वसूली पर जुर्माना ठोका है। यह फैसला आयोग ने हाथरस के एक ग्राहक द्वारा साक्ष्यों के साथ की गई शिकायत के आधार पर सुनवाई के बाद किया है।
जुर्माने में अधिक वसूली गई रकम ब्याज सहित वापसी, वाद व्यय व देश के अनगिनत उपभोक्ताओं से अधिक मूल्य वसूली को ध्यान में रखते हुए 80 हजार रुपये उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने के आदेश दिए हैं। यह फैसला आयोग के स्थानीय अध्यक्ष न्यायाधीश हसनैन कुरैशी व सदस्य आलोक उपाध्याय की संयुक्त पीठ ने सुनाया है।
यह अर्जी मूल रूप से हाथरस के मालिन गली हाल जे-23 ज्ञान सरोवर निवासी 50 वर्ष के मुरारी लाल अग्रवाल की ओर से आयोग में दायर की गई। जिसमें गुजरात कोआपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फैडरेशन अमूल डेयरी रोड आनंद गुजरात के प्रबंध निदेशक व रिनी एजेंसीज मामू भांजा अलीगढ़ के स्वामी यतेंद्र मित्तल को आरोपी बनाया। अर्जी के अनुसार आरोप है कि उन्हें 11 अक्तूबर 2020 को अमूल उत्पादों की अधिकारिक साइट पर रेट लिस्ट मिली। वह पिछले तीन वर्ष से स्थानीय वितरक से 6 लीटर वाला पैक्ड दूध नियमित खरीद रहे थे। अधिकृत कीमत सूची के अनुसार उसकी कीमत 255 रुपये थी, जबकि वितरक द्वारा उसके लगातार 276 रुपये वसूले जा रहे थे।
इस तरह लगातार 21 रुपये प्रति पैकेट पर अतिरिक्त वसूले गए। इसे लेकर स्थानीय वितरक से लेकर यूनिट के टोल फ्री नंबर तक से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। शिकायत पर टाल-मटोल होती रही। इस आधार पर मुरारीलाल अग्रवाल ने देश भर में ग्राहकों संग हो रही अधिक वसूली पर यह शिकायत की। इसके साक्ष्य भी अदालत में पेश किए। बचाव पक्ष की ओर से आरोपों को नकारा गया।
मगर साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने इस आरोप को सही माना और तीन वर्ष में 21 रुपये प्रति पैकेट के अनुसार 22995 रुपये 9 फीसदी ब्याज दर से वापस करने, 25 हजार रुपये वाद व्यय के देने के आदेश दिए हैं। साथ में देश भर में अधिक वसूली को ध्यान में रखते हुए 80 हजार रुपये उपभोक्ता कल्याण कोष में जमा कराने के दिए हैं। यह आदेश दोनों विपक्षियों पर लागू होगा।