उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के नोटिस का जवाब अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय नहीं देगा। विधिक राय लेने के बाद एएमयू प्रशासन ने यह निर्णय लिया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि केंद्रीय विश्वविद्यालय होने के कारण वह राज्य स्तरीय संस्था के प्रति जवाबदेह नहीं है।
जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग द्वारा एएमयू को नोटिस देकर अनुसूचित जाति, जनजाति एवं पिछड़े वर्ग को आरक्षण का लाभ नहीं देने पर जवाब मांगा गया था। आयोग के अध्यक्ष बृजलाल ने 8 अगस्त तक नोटिस का जवाब देने को कहा था। एएमयू प्रशासन द्वारा इस संबंध में विधिक राय ली गई थी।
इसके बाद एएमयू ने उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग को जवाब नहीं देने का फैसला लिया है। एएमयू पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई का कहना है कि एएमयू केंद्रीय विश्वविद्यालय है इसलिए केंद्र सरकार से गवर्न होता है। ऐसे में उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग को जवाब देने की जरूरत नहीं है।
एससी-एसटी आयोग में आज हाजिर होंगे वीसी-रजिस्टार
नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अनुसूचित जाति-जनजाति आयोग में आज एएमयू के कुलपति एवं रजिस्ट्रार हाजिर होंगे। आयोग द्वारा एएमयू को नोटिस देकर पूछा गया था कि किस आधार पर एससी, एसटी एवं ओबीसी का आरक्षण रोका गया है। एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान है तो साक्ष्य दिखाए। आठ अगस्त तक एएमयू को जवाब देना था।
चंद रोज पहले एएमयू द्वारा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति- जनजाति आयोग को जवाब भेजा गया था। इसमें एएमयू का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन होने का उल्लेख किया गया था। चर्चा है कि जवाब से असंतुष्ट होने पर आयोग द्वारा एएमयू को समन जारी किया गया था। हालांकि अधिकारी समन की सूचना से इंकार कर रहे थे। एएमयू पीआरओ आफिस के एमआईसी प्रो. शाफे किदवई ने बताया कि गुरुवार को एएमयू के कुलपति प्रो. तारिक मंसूर रजिस्ट्रार डॉ. नाजिम हुसैन जाफरी के साथ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में अपना पक्ष रखने जाएंगे।