भले ही एएमयू कुलपति पैनल का दस्तावेज अलीगढ़ से दिल्ली तक पहुंच गया हो, लेकिन रोजाना अलग-अलग नाम से कुलपति होने की अफवाह उड़ रही हैं। जानकारों का कहना है कि नए कुलपति की औपचारिक घोषणा होने में समय लगता है। कुलपति नियुक्ति के लिए बाकायदा एक प्रक्रिया होती है, जो एक-दो घंटे या एक-दिन में संभव नहीं है।
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के कुलपति पैनल का दस्तावेज शिक्षा मंत्रालय में पहुंचेगा। पीएमओ से फीडबैक सहित सारी औपचारिकताएं पूर्ण होने के बाद राष्ट्रपति के पास पत्रावली आएगी। यूनिवर्सिटी की विजिटर होने के नाते राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू पैनल में शामिल प्रो. एमयू रब्बानी, प्रो. फैजान मुस्तफा व प्रो. नईमा खातून में से एक नाम पर मुहर लगाएंगी।
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भले ही कुलपति पैनल का दस्तावेज अलीगढ़ से दिल्ली तक पहुंच गया हो, लेकिन रोजाना अलग-अलग नाम से कुलपति होने की अफवाह उड़ रही हैं। जानकारों का कहना है कि नए कुलपति की औपचारिक घोषणा होने में समय लगता है। कुलपति नियुक्ति के लिए बाकायदा एक प्रक्रिया होती है, जो एक-दो घंटे या एक-दिन में संभव नहीं है। कोर्ट बैठक में चुने गए उम्मीदवारों और अन्य कार्यवाही का लेखा-जोखा शिक्षा मंत्रालय के पास जाएगा। जानकारों के अनुसार, यूनिवर्सिटी की विजिटर कुलपति पैनल में से तीन उम्मीदवारों से एक पर मुहर लगाएंगी। लोकसभा चुनाव में जिस पार्टी के सबसे ज्यादा सांसद चुने जाते हैं, उस पार्टी को बहुमत साबित करने के लिए राष्ट्रपति आमंत्रित करता है।
वीसी लॉज नए मुखिया के लिए तैयार
नए कुलपति के आगमन को लेकर वीसी लॉज प्रतीक्षा कर रहा है। महीनों से नियमित कुलपति नहीं हैं। प्रो. तारिक मंसूर के कुलपति पद से इस्तीफा देने के बाद से यह लॉज खाली है। सर सैयद दिवस पर वीसी लॉज पर मेहमानों को दावत दी गई थी। लॉज में साफ-सफाई करा दी गई है।