अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय को यूजीसी अधिनियम 2010 स्वीकार नहीं है और न ही इसके अनुसार नए कुलपति का पैनल बनेगा। शनिवार को एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की विशेष बैठक में एएमयू एक्ट (1920) के अनुसार यानी पुरानी प्रक्रिया के अनुसार ही पैनल बनाने का निर्णय लिया गया। करीब तीन घंटे तक चली बैठक में 2 अप्रैल को ईसी एवं 7 अप्रैल को कोर्ट की विशेष बैठक आयोजित करने का निर्णय लिया गया।
2 अप्रैल को प्रस्तावित ईसी की बैठक में पांच सदस्यों का पैनल तैयार किया जाएगा, जिसे 7 अप्रैल को कोर्ट की बैठक में संस्तुतिके लिए पेश किया जाएगा। कोर्ट की संस्तुति के बाद पांच में से तीन नाम एएमयू के विजीटर (राष्ट्रपति) के पास चयन के लिए भेज दिया जाएगा।
पूर्व से घोषित 16 अप्रैल की कोर्ट मीटिंग को रद्द कर दिया गया है। ईसी की बैठक में एक सदस्य ने यूजीसी अधिनियम को लेकर कुछ सवाल उठाए। यूजीसी अधिनियम 2010 के बदले एएमयू एक्ट के अनुसार पैनल बनाने के निर्णय से पीवीसी सैयद अहमद अली का नाम पैनल में शामिल होने का रास्ता साफ हो गया है। इसके साथ ही यह भी स्पष्ट हो गया है कि जरूरी नहीं कि 10 साल का अनुभव रखने वाले प्रोफेसर ही एएमयू का वीसी बने।
अब इस दौर में पीवीसी समेत प्रशासनिक पदों पर रह चुके लोग भी शामिल हो गए हैं। इधर ईसी की बैठक में लिए गए फैसले के बाद कैंपस में चर्चा का बाजार गरम है। लोग मामला न्यायालय में पहुंचने की अटकलें लगा रहे हैं।
एएमयू कोर्ट के सबसे पुराने सदस्य खुर्शीद अहमद खां का कहना है कि यह समझ में नहीं आ रहा है कि आखिर नए वीसी का पैनल बनाने में इतनी जल्दबाजी क्यों की जा रही है। यूजीसी अधिनियम 2010 को ठुकराए जाने से आशंका है कि केंद्रीय मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा पैनल वापस कर दिया जाए। यदि ऐसा हुआ तो एएमयू की बदनामी होगी।