शिकायत में कहा गया कि घटना पिछले वर्ष डा.आंबेडकर जयंती के दिन की है। उस दिन केंद्र सरकार के आदेश के बावजूद पिछले वर्षों की तरह 14 अप्रैल 2024 को डा.आंबेडकर जयंती पर एएमयू में अवकाश नहीं किया गया। पूछने पर कह दिया कि उन्हें कोई आदेश नहीं मिला है। इस पर उन्होंने अपने सेंटर के गेट पर लगे शीशे पर श्रद्धाभाव से डा.आंबेडकर का पोस्टर लगा दिया। मगर उसे देर शाम किसी ने फाड़ दिया।
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में डा.बीआर आंबेडकर का पोस्टर फाड़ने के आरोपों पर राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने 3 मार्च को एएमयू कुलपति को नोटिस जारी किया है। पिछले वर्ष 14 अप्रैल को आरसीए सेंटर में हुई घटना के विषय में एएमयू के ही छात्रों द्वारा की गई शिकायत का संज्ञान आयोग ने लिया है। जिसमें कुलपति से प्रकरण में विस्तृत जांच सहित पंद्रह दिन में जवाब मांगा है।
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राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग में एएमयू के अनुसूचित वर्ग के छात्र अवनीश कुमार, उपेंद्र कुमार, अजय कुमार, अश्वनी कुमार, भूपेंद्र कुमार, दीपक सिंह, रजनीश राव, अमित राज, आकाश पुनिया आदि की ओर से इसी वर्ष 11 फरवरी को एक शिकायती पत्र भेजा गया। सभी छात्र एएमयू के आवासीय आरसीए सेंटर में अध्ययनरत हैं।
शिकायत में कहा गया कि घटना पिछले वर्ष डा.आंबेडकर जयंती के दिन की है। उस दिन केंद्र सरकार के आदेश के बावजूद पिछले वर्षों की तरह 14 अप्रैल 2024 को डा.आंबेडकर जयंती पर एएमयू में अवकाश नहीं किया गया। पूछने पर कह दिया कि उन्हें कोई आदेश नहीं मिला है। इस पर उन्होंने अपने सेंटर के गेट पर लगे शीशे पर श्रद्धाभाव से डा.आंबेडकर का पोस्टर लगा दिया। मगर उसे देर शाम किसी ने फाड़ दिया। बाद में पता चला कि उस पोस्टर को हॉस्टल के प्रोवोस्ट के इशारे पर कर्मचारी द्वारा फाड़ा गया है, जबकि वहां अन्य फोटो व नोटिस लगे थे। उन्हें नहीं फाड़ा गया था।
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ऐतराज जताने पर प्रोवोस्ट ने अनसुना कर दिया। बाद में एएमयू रजिस्ट्रार से लेकर अन्य सभी पटलों पर एएमयू में शिकायत की गई। मगर अधिकारी जांच के नाम पर टहलाते रहे। इसी क्रम में 11 फरवरी को पोस्टर फाड़ने के संबंध में आयोग में शिकायत की गई। जिस पर संज्ञान लेते हुए आयोग ने अनुच्छेद 338 के तहत शिकायत की जांच करना तय किया है। साथ में कुलपति को नोटिस भेजकर 15 दिन के अंदर डाक से या स्वयं उपस्थित होकर मामले पर की गई कार्रवाई के बारे में विस्तृत जवाब सहित सूचना मांगी है।
यह भी कहा है कि इस अवधि में अगर आयोग को कोई जवाब नहीं मिला तो आयोग दीवानी अदालत की शक्तियों का प्रयोग कर कार्रवाई कर सकता है। यह नोटिस आयोग के निदेशक वीके सिंह की ओर से जारी किया गया है। इस मामले में प्राक्टर प्रो.वसीम अली का कहना है कि उन्हें इस तरह के किसी नोटिस की जानकारी नहीं है। अगर आया है तो जांच व तथ्यों सहित जवाब दिया जाएगा।