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जमीन लुटाने, खजाना लूटने नहीं, एएमयू की सेवा करने आया हूं

Wed, 11 Nov 2015 01:24 AM IST
अलीगढ़।
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अलीगढ़। लंबे समय से जमीन के मसले को लेकर मचे घमासान पर आखिरकार अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति ले. जनरल जमीरउद्दीन शाह (सेवानिवृत्त) को चुप्पी तोड़नी पड़ी। उन्होंने बयान जारी कर कहा है कि वह यहां खजाना लूटने या अपने बच्चों के लिए पुश्तैनी जमींदारी स्थापित करने नहीं, प्रतिष्ठित नौकरी से सेवानिवृत्त होने के बाद इस संस्थान की सेवा करने आए हैं।  
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इच्छा के विपरीत बनाया गया था ट्रस्टीसर सैयद फाउंडेशन पर उठ रहे सवालों पर कुलपति ने कहना है कि एएमयू का कुलपति इस फाउंडेशन का अध्यक्ष होगा। उनकी इच्छा के विपरीत उन्हें फाउंडेशन का आजीवन ट्रस्टी नियुक्त कर दिया गया। वह चाहते थे कि सेवानिवृत्त होने के बाद शिक्षा के विकास के लिए कार्य करें, पर अब ऐसा असंभव लगता है।  
विरोध के बाद बिल्डर ने गेस्ट हाउस का प्रस्ताव लिया वापस  कुलपति का कहना है कि 2017 में सर सैयद जयंती पर बड़ी संख्या में अतिथि आने वाले हैं। अभी संस्थान के पास उच्चस्तरीय गेस्ट हाउस नहीं है।  बिल्ट ऑपरेट ट्रांसफर (बीटीओ) के आधार पर एएमयू के एक पूर्व छात्र ने गेस्ट हाउस के लिए ग्रांट उपलब्ध कराने की पेशकश की थी। इसके तहत बिल्डर को 25 वर्ष के लिए विश्वविद्यालय की 10 हजार स्कॉयर गज भूमि पट्टे पर देनी थी। बदले में बिल्डर को 100 कमरों का एक उच्च स्तरीय गेस्ट हाउस का निर्माण अपने खर्चे पर करना था। जिसके 10 कमरे विवि गेस्ट हाउस के किराए की दर पर एएमयू के लिए सदैव आरक्षित रहते। अन्य कमरों के निर्माण का खर्च पूरा करने को बाजार दर पर किराए पर दिए जाने थे। विवाद उठने के चलते बिल्डर ने अपना प्रस्ताव वापिस ले लिया। 
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स्कूल का निर्माण कार्य ठपदंगा प्रभावित मुजफ्फरनगर के जोला में जमीन को लेकर उठे विवाद के संबंध में कुलपति ने कहा कि जहां स्कूल का निर्माण कार्य शुरू किया गया है, वह रिफ्यूजी कैंपों का केंद्र था। इसके लिए फंड यूनिवर्सिटी के छात्रों ने सर सैयद डे के डिनर के मौके पर उपलब्ध कराया था। अमुटा ने भी बड़ी रकम देने का वादा किया था। बाद में पीछे हट गई। जमीन देने वाले ग्रामीणों ने एएमयू के ‘शुभचिंतकों’ के कहने में आकर अपना प्रस्ताव वापिस ले लिया। जब उन्होंने अपनी इच्छा व्यक्त की कि इस स्कूल को उपहार स्वरूप रिफ्यूजियों के हवाले कर देंगे तो दान दाताओं के इरादे भी बदल गए। एएमयू छात्रों द्वारा दी गई बड़ी राशि अभी खर्च नहीं हुई है क्योंकि निर्माण कार्य रोक दिया गया है।
क्यों देनी पड़ी सफाई नवंबर 7 को एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक में जमीन से संबंधित प्रस्ताव पेश किया जाना था। इसमें मुजफ्फरनगर के गांव जोला की जमीन सर सैयद फाउंडेशन के नाम करने, हबीब हाल के पास गेस्ट हाउस बनाने के लिए 10 हजार वर्ग गज जमीन मुंबई के बिल्डर को देने, एएमयू के मुर्शीदाबाद, किशनगंज एवं मल्लापुरम केंद्र को दो-दो एकड़ जमीन सर सैयद फाउंडेशन को स्कूल बनाने के लिए देने का प्रस्ताव था। ऐसा ही प्रस्ताव बहराइच की जमीन से भी संबंधित था। सबसे पहले इसका विरोध ओल्ड ब्वायज के आजममीर ने किया। उसके बाद एएमयू के पूर्व कुलपति महमूद उर रहमान ने इसकी निंदा की। अमुटा, एएमयू इंपलाइज यूनियन, एएमयू टेक्निकल स्टाफ एसोसिएशन, एएमयू ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन, एमपीएस इंपलाइज यूनियन, एएमयू आफिसर्स एसोसिएशन एवं आरडीए ने जब प्रस्ताव का विरोध किया तो इंतजामिया को पांव पीछे खींचना पड़े।
कोर्ट में हारे लोग मेरे विरुद्ध अफवाह फैला रहे हैं अलीगढ़। एएमयू कुलपति जमीरउद्दीन शाह का कहना है कि उन्हें हटाने की मुहिम में जुटे लोग इलाहाबाद हाई कोर्ट में पराजित होने के बाद अब अफवाह फैला रहे हैं। अमुटा सचिव मुस्तफा जैदी का नाम लिए बगैर उन्होंने कहा कि एक ऐसे शिक्षक को निलंबित किया जो क्लास में अनुपस्थित रहता था। संयोग से वह शिक्षक अमुटा के सचिव हैं। मैंने अमुटा के खिलाफ नहीं, लापरवाह शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई की है। अभी मेरा डेढ़ साल का कार्यकाल बाकी है। मेरा प्रयास है कि अपनी योग्यता से अपनी जिम्मेदारियों का निर्वाह करूं।
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