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एएमयू के सफर का साक्षी ‘स्ट्रेेची हॉल’

Mon, 18 Apr 2016 01:49 AM IST
अलीगढ़/ब्यूरो
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एएमयू - फोटो : रुपेश
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 अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के निरंतर प्रगति एवं उतार-चढ़ाव का गवाह है यहां का ‘स्ट्रेची हॉल’। इसको यूनिवर्सिटी का पहला भवन होने का गौरव प्राप्त है। 1877 में इसकी नींव तत्कालीन गवर्नर जनरल लार्ड लिटन ने रखी थी। 1894 में हॉल बनकर तैयार होने पर इसका उद्घाटन गवर्नर सर चार्ल्स ने किया था। इस हॉल को बनाने के लिए एएमयू के संस्थापक सर सैयद अहमद खान ने स्वयं काफी प्रयास किए थे।
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  24 अप्रैल 1885 को इस हॉल को बनाने के लिए 60 हजार रुपये खर्च का आकलन किया गया था। 6 अक्टूबर 1885 को 13 यूरोपियन समेत कुल 74 लोगों ने 500-500 रुपये का सहयोग दिया था। 30 दिसंबर 1893 को सर सैयद की रिपोर्ट के अनुसार 86 डोनर ने 43 हजार रुपये का योगदान दिया था। 34 लोगों के योगदान की और जरूरत थी। 12 नवंबर 1894 को स्ट्रेची हॉल के निर्माण पर कुल खर्च 90 हजार रुपये आया था।
यह हॉल 7 हजार स्कॉवयर फीट में है। एएमयू के सर सैयद हॉल साउथ परिसर में स्थित इस ऐतिहासिक विरासत को देखने की ललक हर इतिहास प्रेमी को रहती है। एएमयू पीआरओ सलाहकार डॉ. राहत अबरार कहते हैं कि एमएओ कॉलेज जब 1920 में विश्वविद्यालय बना तो इसी हॉल में भव्य समारोह का आयोजन किया गया था। यह भवन ब्रिटिश एवं मुगल आर्किटेक का नमूना है।
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एएमयू के छात्र (फिलहाल निलंबित) अमीर मिंटो स्ट्रेेची हॉल को लेकर इंतजामिया से लंबी लड़ाई लड़ चुके हैं। उनका कहना है कि स्ट्रेची हॉल में कुछ कार्य इंतजामिया ने कराए हैं लेकिन उसमें आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के मानक का ध्यान नहीं रखा गया। उनका यह भी कहना है कि उनके विरोध के बाद हॉल में लेंटर डालने का कार्य रुक गया। वहीं एएमयू प्रशासन का कहना है कि स्ट्रेची हॉल में मानक के विपरित कोई काम नहीं हुआ है। डॉ. राहत अबरार कहते है कि एएमयू में किला एवं जामा मस्जिद आदि हैरिटेज बिल्डिंग है।
दीवानी की हेरीटेज बिल्डिंग
अलीगढ़। अंग्रेजी हुकूमत के दौरान अलीगढ़ में 1905 में कचहरी की स्थापना के समय दीवानी स्थित मुख्य भवन का निर्माण कराया गया। उस समय  भवन को इलाहाबाद हाईकोर्ट जैसी शक्ल में बनवाना तय हुआ। फिर अंग्रेजी हुकूमत के इंजीनियरों ने इस भव्य इमारत को खड़ा कराया और यहां कचहरी संचालित हुई। देश की आजादी बाद यहां जिला न्यायालय स्थापित हुआ। दि सिविल एसोसिएशन ट्रस्ट शुरू हुआ। जिसके पहले अध्यक्ष केबीएस अब्दुल्ला चुने गए थे।
उनकी देखरेख में यहां सिविल वार व आसपास के कमरों का निर्माण कराया गया था। दि सिविल बार के अध्यक्ष पद पर 14 बार काबिज रह चुके बुजुर्ग अधिवक्ता जेसी माहेश्वरी बताते हैं कि देश भर में किसी जनपद न्यायालय का भवन इस स्वरूप में और इतना भव्य नहीं है। 2012 में इसे हेरीटेज भवन घोषित किया गया है। अब इसके संरक्षण पर गंभीरता के साथ ध्यान दिया जा रह है।
यहां और ध्यान दें तो बने बात
अलीगढ़। अलीगढ़ में इसी तरह से ऐतिहासिक महत्व की इमारताें में ऊपरकोट की सोने से सजी जामा मसजिद, एएमयू का पुराना किला, एएमयू की 100 साल पुरानी जामा मसजिद, बारहद्वारी का पुराना घंटाघर भवन, तस्वीर महल पर बना ब्रिटिश अफसरों का पुराना कब्रिस्तान, गांधी आई हास्पिटल का पुराना भवन, जयगंज स्थित ताला भवन भी महत्वपूर्ण है। इन इमारतों को संरक्षित कर हेरिटेज भवनों में शामिल किया जाना चाहिए। लेकिन स्थानीय स्तर पर कोई संस्था या व्यक्तिगत रूप से उल्लेखनीय प्रयास नहीं होने से इनकी देखरेख निजी स्तर पर ही हो रही है।
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