एएमयू में प्रदर्शन के दौरान छात्राएं
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छात्रसंघ चुनाव के लिए छात्राओं ने संभाला मोर्चा, बाब-ए-सैयद किया बंद
एएमयू में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार को और तेज हो गया। आंदोलन के 17वें दिन छात्राओं ने मोर्चा संभाल लिया। सुबह से ही अलग-अलग गर्ल्स हॉस्टल से छात्राएं डक पॉन्ड पहुंचने लगीं। छात्रों ने बाब-ए-सैयद और शताब्दी द्वार बंद कर दिए। वीमेंस कॉलेज और जेएन मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस छात्राओं ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर यासिर फहद के समर्थन में नारेबाजी की। इस दौरान गर्ल्स हॉस्टल के दरवाजे तोड़े जाने की भी सूचना सामने आई।
सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुआ विरोध शाम तक जारी रहा। अलग-अलग हॉस्टलों और विभागों से छात्र जुलूस की शक्ल में डक पॉन्ड पहुंचे। परिसर में देश की महान विभूतियों के पोस्टर लगाए गए। शाम चार बजे शोधार्थियों ने डक पॉन्ड से यूनियन हॉल तक मार्च निकाला। इसके बाद छात्रों ने बाब-ए-सैयद और शताब्दी द्वार बंद कर दिए।
भौतिक विज्ञान विभाग में कक्षाएं बंद कराने के दौरान भी हंगामा हुआ। इसी दौरान एक छात्रा बेहोश हो गई। उधर, यासिर फहद ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो वह संसद, दिल्ली तक पैदल कूच करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। छात्रसंघ चुनाव, छात्रों पर निलंबन और प्रॉक्टर का इस्तीफा लेकर रहेंगे।
एएमयू डक पॉन्ड पर छात्र संघ चुनाव के लिए छात्राओं की दिनभर रही गहमागहमी
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यासिर को अस्पताल ले जाने पर देर रात भिड़े छात्र-प्रॉक्टर
मंगलवार देर रात भूख हड़ताल पर बैठे यासिर फहद को जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने को लेकर भी जमकर हंगामा हुआ। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अंजुम परवेज की ओर से जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। इसमें यासिर का ब्लड प्रेशर कम होने और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए जाने की जरूरत बताई गई थी।
रात करीब 11:45 बजे के बाद करीब 10-12 डॉक्टरों की टीम तीन एंबुलेंस के साथ धरना स्थल पहुंची। डॉक्टरों ने यासिर को मेडिकल कॉलेज चलने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने जाने से इन्कार कर दिया। उनके समर्थन में अन्य छात्र भी मौके पर जुट गए। इसी बीच प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान पहुंचे। छात्रों और प्रॉक्टर के बीच नोकझोंक हुई। काफी देर चले हंगामे के बाद मेडिकल टीम वापस लौट गई।
अमुटा पदाधिकारियों का मलाल, राय तक नहीं ले रहीं कुलपति
आंदोलन के बढ़ते दायरे और परिसर में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच एएमयू शिक्षक संघ (अमुटा) ने भी चिंता जताई है। अमुटा पदाधिकारियों का कहना है कि आंदोलन खत्म कराने में उनकी राय तक कुलपति नहीं ले रही हैं।
अमुटा अध्यक्ष प्रो. तुफैल अहमद ने कहा कि भूख हड़ताल को 17 दिन हो चुके हैं। अमुटा के पदाधिकारी यासिर से मिल भी चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुलपति किसी ऐसे वरिष्ठ और गैर-विवादित शिक्षक को छात्रों के बीच भेजें, जो उनसे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुने। समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास करे। प्रो. तुफैल अहमद ने कहा कि रात के समय परिस्थितियां चिंताजनक हो गई थीं। लगातार आंदोलन के कारण यूनिवर्सिटी की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। अब राजनीतिक दलों की सक्रियता भी दिखाई देने लगी है। ऐसे में मामले का जल्द समाधान जरूरी है। अमुटा सचिव डॉ. अशरफ मतीन और संयुक्त सचिव डॉ. जमील अहमद ने भी यूनिवर्सिटी प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की।