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एएमयू: रात में साइन डाई की अफवाह पर भड़के छात्र, आज करेंगे लॉकडाउन, यासिर को अस्पताल ले जाने पर हुई नोक-झोंक

Thu, 08 Oct 2026 10:36 AM IST
Chaman Kumar Sharma अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर आंदोलन 17वें दिन जारी रहा। छात्राओं ने मोर्चा संभाला। वीमेंस कॉलेज और जेएन मेडिकल की छात्राओं ने डक पॉन्ड पर नारेबाजी की। बाब-ए-सैयद और शताब्दी द्वार बंद कर दिए गए। भूख हड़ताल पर बैठे यासिर फहद का बीपी कम हो गया। जेएन मेडिकल की टीम तीन एंबुलेंस लेकर पहुंची। यासिर ने जाने से इनकार कर दिया।
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एएमयू छात्र संघ चुनाव को लेकर प्रदर्शन करतीं छात्राएं - फोटो : संवाद
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विस्तार
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एएमयू में चल रहे छात्रों के आंदोलन के बीच बुधवार देर रात साइन डाई लागू होने की अफवाह तेजी से फैल गई। धरनास्थल पर यह मैसेज पहुंचा कि अगर भूख हड़ताल खत्म नहीं हुई तो विश्वविद्यालय साइन डाई कर सकता है। इसके बाद छात्रों में आक्रोश बढ़ गया और रात में ही आंदोलन उग्र करने का फैसला लिया गया। अलग-अलग छात्र ग्रुपों में बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे से प्रदर्शन और इसके बाद कैंपस लॉकडाउन किए जाने के संदेश भी साझा किए गए।

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दरअसल, बुधवार शाम छात्रों के एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय प्रबंधन से मुलाकात की थी। बातचीत में कोई समाधान नहीं निकल सका। इसके कुछ घंटे बाद साइन डाई की खबर फैल गई। छात्रों के बीच चर्चा होने लगी कि हालात नहीं सुधरे तो विश्वविद्यालय को अनिश्चितकाल के लिए बंद किया जा सकता है। इसी के बाद आंदोलन को और तेज करने की रणनीति पर चर्चा शुरू हो गई। छात्रों के बीच प्रसारित संदेशों के मुताबिक, बृहस्पतिवार सुबह 11 बजे से प्रदर्शन शुरू करने और बाद में कैंपस लॉकडाउन करने की तैयारी है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन ने साइन डाई को लेकर किसी निर्णय से साफ इन्कार किया है।

19 साल में तीन बार लगा साइन डाई
एएमयू में बीते 19 साल में तीन बार साइन डाई लागू किए जाने का उल्लेख मिलता है। 17 सितंबर 2007 को छात्र मझहर नईम की हत्या के बाद हुए हिंसक प्रदर्शन के चलते विश्वविद्यालय बंद किया गया था। 31 अक्तूबर 2009 को एक छात्र की हत्या के बाद लंबे आंदोलन के दौरान भी साइन डाई का फैसला लिया गया। इसके बाद 30 अप्रैल 2011 को छात्रों के बीच हिंसक झड़प और गोलीबारी के बाद विश्वविद्यालय में साइन डाई लगाया गया था।

साइन डाई को लेकर किसी भी तरह के फैसले की जानकारी मुझे नहीं है। यह सिर्फ अफवाह है। छात्रों से कई बार बातचीत हुई है, लेकिन उन्हें बाहर से समर्थन मिल रहा है। हालात नहीं बदले तो प्रबंधन को सख्त कदम उठाने पड़ेंगे। - प्रो. मोहम्मद नवेद खान, प्रॉक्टर, एएमयू

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एएमयू में प्रदर्शन के दौरान छात्राएं - फोटो : संवाद
छात्रसंघ चुनाव के लिए छात्राओं ने संभाला मोर्चा, बाब-ए-सैयद किया बंद
 एएमयू में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर चल रहा आंदोलन बुधवार को और तेज हो गया। आंदोलन के 17वें दिन छात्राओं ने मोर्चा संभाल लिया। सुबह से ही अलग-अलग गर्ल्स हॉस्टल से छात्राएं डक पॉन्ड पहुंचने लगीं। छात्रों ने बाब-ए-सैयद और शताब्दी द्वार बंद कर दिए। वीमेंस कॉलेज और जेएन मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस छात्राओं ने भी धरना स्थल पर पहुंचकर यासिर फहद के समर्थन में नारेबाजी की। इस दौरान गर्ल्स हॉस्टल के दरवाजे तोड़े जाने की भी सूचना सामने आई।

सुबह करीब 10 बजे से शुरू हुआ विरोध शाम तक जारी रहा। अलग-अलग हॉस्टलों और विभागों से छात्र जुलूस की शक्ल में डक पॉन्ड पहुंचे। परिसर में देश की महान विभूतियों के पोस्टर लगाए गए। शाम चार बजे शोधार्थियों ने डक पॉन्ड से यूनियन हॉल तक मार्च निकाला। इसके बाद छात्रों ने बाब-ए-सैयद और शताब्दी द्वार बंद कर दिए।

भौतिक विज्ञान विभाग में कक्षाएं बंद कराने के दौरान भी हंगामा हुआ। इसी दौरान एक छात्रा बेहोश हो गई। उधर, यासिर फहद ने कहा कि छात्रसंघ चुनाव की मांग पूरी होने तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि मांगें नहीं मानी गईं तो वह संसद, दिल्ली तक पैदल कूच करने से भी पीछे नहीं हटेंगे। छात्रसंघ चुनाव, छात्रों पर निलंबन और प्रॉक्टर का इस्तीफा लेकर रहेंगे।
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एएमयू डक पॉन्ड पर छात्र संघ चुनाव के लिए छात्राओं की दिनभर रही गहमागहमी - फोटो : संवाद
यासिर को अस्पताल ले जाने पर देर रात भिड़े छात्र-प्रॉक्टर
मंगलवार देर रात भूख हड़ताल पर बैठे यासिर फहद को जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराने को लेकर भी जमकर हंगामा हुआ। जेएन मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. अंजुम परवेज की ओर से जिला प्रशासन और विश्वविद्यालय प्रशासन को रिपोर्ट भेजी गई थी। इसमें यासिर का ब्लड प्रेशर कम होने और इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराए जाने की जरूरत बताई गई थी।

रात करीब 11:45 बजे के बाद करीब 10-12 डॉक्टरों की टीम तीन एंबुलेंस के साथ धरना स्थल पहुंची। डॉक्टरों ने यासिर को मेडिकल कॉलेज चलने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने जाने से इन्कार कर दिया। उनके समर्थन में अन्य छात्र भी मौके पर जुट गए। इसी बीच प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान पहुंचे। छात्रों और प्रॉक्टर के बीच नोकझोंक हुई। काफी देर चले हंगामे के बाद मेडिकल टीम वापस लौट गई।

अमुटा पदाधिकारियों का मलाल, राय तक नहीं ले रहीं कुलपति
आंदोलन के बढ़ते दायरे और परिसर में लगातार हो रहे विरोध-प्रदर्शनों के बीच एएमयू शिक्षक संघ (अमुटा) ने भी चिंता जताई है। अमुटा पदाधिकारियों का कहना है कि आंदोलन खत्म कराने में उनकी राय तक कुलपति नहीं ले रही हैं।

अमुटा अध्यक्ष प्रो. तुफैल अहमद ने कहा कि भूख हड़ताल को 17 दिन हो चुके हैं। अमुटा के पदाधिकारी यासिर से मिल भी चुके हैं। उन्होंने कहा कि कुलपति किसी ऐसे वरिष्ठ और गैर-विवादित शिक्षक को छात्रों के बीच भेजें, जो उनसे बातचीत कर उनकी समस्याएं सुने। समाधान का रास्ता निकालने का प्रयास करे। प्रो. तुफैल अहमद ने कहा कि रात के समय परिस्थितियां चिंताजनक हो गई थीं। लगातार आंदोलन के कारण यूनिवर्सिटी की पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। अब राजनीतिक दलों की सक्रियता भी दिखाई देने लगी है। ऐसे में मामले का जल्द समाधान जरूरी है। अमुटा सचिव डॉ. अशरफ मतीन और संयुक्त सचिव डॉ. जमील अहमद ने भी यूनिवर्सिटी प्रशासन से मामले को गंभीरता से लेने की अपील की।
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