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एएमयू तराने के साथ नागरिकता कानून का विरोध

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बाब ए सैयद पर नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में तराना गाते एएमयू छात्र-छात्राएं। - फोटो : CITY OFFICE
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नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में शुक्रवार को जुमे की नमाज के बाद छात्रों ने बाब-ए-सैयद पर विश्वविद्यालय का तराना (एएमयू तराना) गाया। मजाज के लिखे इस तराने के जरिए छात्रों ने एकजुटता का संदेश दिया और संकेत दिया कि आंदोलन अभी जारी रहेगा।
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एएमयू में शुक्रवार को जुमे की नमाज अदा की गई। फिर शांति और तरक्की की दुआ मांगी गई। इसके बाद छात्र-छात्राएं बाब-ए-सैयद पर इकट्ठा हुए। यहां पर एएमयू के ही छात्र रहे। छात्रों ने शायर असरारुल हक मजाज (मजाज लखनवी) का एएमयू के लिए लिखा तराना (ये मेरा चमन, ये मेरा चमन, मैं अपने चमन का बुलबुल हूं...) सामूहिक रूप से गाया। इसके बाद राष्ट्रगान भी हुआ।
इसके बाद एएमयू छात्र संघ के निवर्तमान अध्यक्ष सलमान इम्तियाज ने कहा कि जिन छात्रों पर गुंडा एक्ट लगाया गया है वह बिल्कुल गलत है। हुजैफा आमिर, हमजा सूफियान सहित तीन लोग अलीगढ़ में मौजूद ही नहीं थे। गुंडा एक्ट उन पर लगना चाहिए, जिन्होंने एएमयू के हॉस्टलों में घुसकर तोड़फोड़ की और गोली चलाई। इम्तियाज ने कहा कि हमारी छात्रों से अपील है कि वह जल्द से जल्द एएमयू लौट कर आएं और हमारी तहरीक को ताकत दें। एएमयू समुदाय वह समुदाय है, जो अपनी ताकत का अहसास कराना जानता है। हम इस सीएए को वापस करके ही दम लेंगे।
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उन्होंने कहा कि तराना हमारे हर एल्युमिनाई को याद है। कुछ लोग अभी ऐसे हैं, जो सोए हुए हैं। उन्हें जागृत करने के लिए तराना गाया गया है। हम हिंदुस्तान के लोकतांत्रिक स्वरूप में यकीन रखते हैं। जो लोग हम पर सवाल करते हैं, उनका अतीत देखें कि किस तरह वह तिरंगे का अपमान करते हैं।
कानून के विरोध में एक छात्रा ने कहा कि हमने संवैधानिक दायरे में यहां तराना गाया है। इसलिए भी कि यह सीएए संविधान की प्रस्तावना के खिलाफ है। इस कानून के खिलाफ जामिया सहित पूरे देश में प्रदर्शन हो रहे हैं, जो इसका विरोध कर रहा है, उसे देश विरोधी बताया जा रहा है लेकिन हम यहां पर अपने प्रदर्शन से यह साबित करना चाहते हैं कि हम देश विरोधी नहीं बल्कि हम भी राष्ट्रवादी हैं। इस अवसर पर प्रॉक्टर टीम भी मौजूद रही। सभी कुछ शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया।
कौन थे असरारुल हक मजाज
19 अक्तूबर 1911 को तत्कालीन यूनाइटेड प्रोविंस के आगरा में जन्मे मजाज ने 1931 से एएमयू से बीए किया। उनकी बड़ी बहन सफिया की शादी जानिसार अख्तर से हुई थी, जो पटकथा लेखक और शायर जावेद अख्तर के पिता हैं। इस तरह मजाज जावेद अख्तर के मामा भी थे, जिस समय मजाज एएमयू में पढ़ रहे थे, उस समय एएमयू में अपने दौर के कई मशहूर लेखक और उर्दू शायर मौजूद रहे थे। फैज अहमद फैज, फानी बदायूंनी, जाजिब, मकदूम, अली सरदार जाफरी मजाज के नजदीकी मित्रों में से थे।

नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में नारेबाजी करते विद्यार्थी।- फोटो : CITY OFFICE

बाब ए सैयद गेट पर नागरिकता संशोधन कानून के विरोध प्रदर्शन के बाद राष्ट्रीय गान गाते एएमयू के विद?- फोटो : CITY OFFICE

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