नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में एएमयू में बाब-ए सैयद पर धरना बुधवार को भी जारी रहा। बुधवार को इस आंदोलन में अब तक शहीद हुए लोगों के नाम पेड़ पर लिखे और उन्हें श्रद्धांजलि दी गई। साथ ही हस्ताक्षर अभियान भी चलाया गया।
धरने पर छात्रों ने बताया कि मंगलवार को एनआरसी पर आधारित वृतचित्र ‘स्टेटलेस असम एनआरसी’ की स्क्रीनिंग रोकने के लिए प्रॉक्टर टीम के आदेश की निंदा की गई। इसके लिए प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग भी की गई। छात्रों ने कहा कि राज्य में अराजकता के लिए पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) को जिम्मेदार ठहराकर उसे निशाना बनाया जा रहा है। क्योंकि यह तब भी मुखर था और आज भी मुखर रहा है जब अन्य संगठन चुप हैं।
यह विरोध प्रदर्शन को बंद कराने का एक और प्रयास है। छात्रों ने कोलकाता में जाने माने फोटोग्राफर और फिल्म निर्माता रॉनी सेन के ऊपर हमले की कड़ी निंदा की। उन पर सीएए और एनआरसी के विरोध में भाग लेने के लिए खंजर से हमला किया गया था।
इसी तरह तमिलनाडु में लेखक नेल्लई कन्नन को पुलिस ने उनके भाषण के लिए उन पर मुकदमा दर्ज किया। छात्रों ने कहा कि आईआईटी कानपुर ने यह तय करने के लिए पैनल का गठन किया है कि फैज अहमद फैज द्वारा लिखी गई कविता ‘हम देखेंगे’ हिंदू विरोधी है या नहीं। यह बेहद हास्यास्पद है। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि साहित्यिक प्रतिभा की एक प्रसिद्ध कविता को केवल इस्लामी शब्दावली के उपयोग के कारण हिंदू विरोधी के रूप में देखा जा रहा है। छात्रों ने कहा कि वह जामिया मिलिया इस्लामिया सहित सभी छात्र निकायों के साथ खड़े हैं।