जूस पिलाकर भूख हड़ताल खत्म करातीं एएमयू वीसी
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एएमयू में छात्रसंघ चुनाव के लिए शुरू हुआ आंदोलन 19 दिन तक चला। इन 19 दिनों में 10 ऐसी वजहें सामने आईं जिसने यूनिवर्सिटी प्रशासन पर दबाव बढ़ाया। इस दबाव का परिणाम शुक्रवार को छात्रों की बड़ी जीत के रूप में सामने आया। आइए जानते हैं उन 10 वजहों के बारे में जिन्होंने छात्र आंदोलन को सफलता के मुकाम तक पहुंचाने में बड़ी भूमिका अदा की।
कारण-01
निलंबन और एफआईआर से बढ़ा टकराव
आंदोलन के दौरान छात्रों के निलंबन और एफआईआर ने विवाद को गहरा कर दिया। छात्र इसे अपनी मांगों के समर्थन में आवाज उठाने पर कार्रवाई के रूप में देख रहे थे। कार्रवाई और विरोध के बीच संवाद की गुंजाइश कम होती गई। यही टकराव आगे चलकर व्यापक आंदोलन की वजह बना।
कारण-02
भूख हड़ताल बनी आंदोलन का केंद्र
निलंबित एमए उर्दू के छात्र यासिर फहद की लगातार 19 दिन तक चली भूख हड़ताल आंदोलन का सबसे अहम पहलू रहा। चुनाव की तारीख घोषित करने समेत प्रमुख मांगों पर अड़े रहने से मामला लगातार गंभीर होता गया। लंबी भूख हड़ताल ने प्रशासन पर जल्द समाधान निकालने का दबाव बढ़ाया।
कारण-03
अस्पताल में भर्ती से इन्कार ने बढ़ाई चिंता
भूख हड़ताल के दौरान यासिर फहद ने जेएन मेडिकल कॉलेज में भर्ती होने से इन्कार कर दिया। इससे आंदोलन का मानवीय पक्ष और अधिक चर्चा में आया। स्वास्थ्य संबंधी चिंता के बीच भी मांगों पर अड़े रहने से प्रशासन के सामने चुनौती बढ़ गई। इस घटनाक्रम ने आंदोलन को केवल चुनावी मांग के बजाय छात्र और प्रशासन के बीच भरोसे के संकट के रूप में भी सामने रखा।
कारण-04
छात्र-छात्राओं ने दिखाई एकजुटता
शुरुआत में सीमित दिखाई देने वाला विरोध धीरे-धीरे व्यापक छात्र आंदोलन में बदल गया। छात्राओं की भागीदारी और अलग-अलग छात्र समूहों की एकजुटता ने इसे मजबूती दी। वीमेंस कॉलेज की छात्राओं की नारेबाजी और अन्य छात्रों के समर्थन से चुनाव का मुद्दा परिसर के विभिन्न वर्गों तक पहुंच गया। इससे प्रशासन के लिए आंदोलन को नजरअंदाज करना मुश्किल होता गया।
एएमयू में जश्न मनातीं छात्राएं
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कारण-05
पूर्वांचल लॉबी के प्रभाव की भी रही चर्चा
आंदोलन के बीच यूनिवर्सिटी प्रशासन में कथित पूर्वांचल लॉबी के प्रभाव को लेकर भी चर्चाएं उठीं। इसे प्रशासनिक निर्णयों और छात्र असंतोष के संदर्भ में देखा गया। हालांकि, किसी लॉबी के प्रभाव या फैसलों पर उसके निर्णायक नियंत्रण की पुष्टि के लिए ठोस प्रमाण जरूरी हैं। ऐसे में यह पहलू आरोपों और चर्चाओं के दायरे में ही रखा जाना चाहिए, न कि स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत किया जाना चाहिए।
कारण-06
बाहरी समर्थन से व्यापक होता गया प्रभाव
आंदोलन को सीजेपी और राजनीतिक दलों से जुड़े नेताओं का समर्थन मिलने से इसका दायरा यूनिवर्सिटी परिसर से बाहर तक बढ़ा। अलग-अलग राजनीतिक आवाजों और छात्र संगठनों की भागीदारी ने छात्रसंघ चुनाव के मुद्दे को व्यापक चर्चा का विषय बनाया। इससे प्रशासन पर आंदोलन का समाधान निकालने का दबाव और बढ़ा।
कारण-07
पढ़ाई प्रभावित होने से बढ़ती गई चिंता
आंदोलन का असर शैक्षणिक गतिविधियों पर भी पड़ा। कक्षाओं में पढ़ाई प्रभावित होने से उन छात्रों की चिंता बढ़ी, जो आंदोलन से सीधे तौर पर जुड़े नहीं थे। विश्वविद्यालय के सामने एक ओर चुनाव और छात्र प्रतिनिधित्व का सवाल था, तो दूसरी ओर पढ़ाई को सामान्य बनाए रखने की चुनौती। लंबे गतिरोध ने जल्द समाधान की जरूरत को और स्पष्ट कर दिया।
कारण-08
यूनिवर्सिटी के सभी गेट बंद होने से बढ़ा संकट
विरोध के तेज होने के दौरान यूनिवर्सिटी के सभी गेट बंद होने की स्थिति ने मामले को और गंभीर बना दिया। परिसर की सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं और आंदोलन का असर व्यापक स्तर पर दिखाई देने लगा। गेट बंद होने की घटना ने यह संकेत दिया कि विवाद अब केवल मांगपत्र या धरने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यूनिवर्सिटी के सामान्य संचालन को भी प्रभावित करने लगा था।
एएमयू में जश्न, यूनियन हॉल पर झंडा फहराते छात्र
- फोटो : संवाद
कारण-09
एएमयू प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल
भूख हड़ताल लंबा खिंचने और समाधान में देरी को लेकर मीडिया और सोशल मीडिया पर एएमयू प्रशासन की आलोचना हुई। अमानवीय व्यवहार पर उठे सवालों ने प्रशासन की छवि और संवाद के तरीके पर बहस तेज की। लगातार सार्वजनिक आलोचना के बीच प्रशासन के सामने केवल आंदोलन खत्म कराने की नहीं, बल्कि छात्रों का भरोसा बहाल करने की चुनौती भी थी।
कारण-10
सर सैयद डे की तैयारियों का बढ़ा दबाव
सर सैयद डे की तैयारियों के दौरान आंदोलन का जारी रहना यूनिवर्सिटी प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौती बना। परिसर में तनाव, पढ़ाई का प्रभावित होना और लगातार आलोचना के बीच आयोजन की तैयारियां भी प्रभावित होने की आशंका थी। ऐसे माहौल में चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और प्रशासनिक स्तर पर बदलाव से गतिरोध खत्म करने का रास्ता खुला।
एएमयू में लगे पूर्वांचल जिंदाबाद के नारे
छात्रसंघ चुनाव सहित सभी मांगें मान लिए जाने के बाद डक पॉन्ड पर छात्रों ने पूर्वांचल जिंदाबाद और जय पूर्वांचल के नारे लगाए। यह नारा सुनकर पश्चिमी यूपी के छात्रों को बुरा भी लगा। कई छात्र वहां से चले भी गए। जेन-जी के आंदोलन के दबाव में कुलपति ने प्रो. नवेद खान को हटाकर जिन्हें प्रो. मोहम्मद नफीस अंसारी को नया प्रॉक्टर बनाया है। प्रो. मोहम्मद नफीस अंसारी बिहार से आते हैं। भूख हड़ताल पर बैठने वाले यासिर फहद भी पूर्वांचल यानी बलरामपुर जिले के पचपेड़वा के हैं। यही वजह है कि आंदोलन की जीत को छात्रों ने पूर्वांचल के साथ जोड़ा और नारेबाजी की।
प्रदर्शन के लिए दिल्ली जा रहे एएमयू के विधि छात्र समेत कई हिरासत में
दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के विधि छात्र अमजद अली उर्फ सिवान समेत कई छात्रों को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। छात्र दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी मेडिकल चौकी पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। अमजद अली उर्फ सिवान के साथ अन्य छात्र भी जंतर-मंतर पर होने वाले धरना-प्रदर्शन में शामिल होने के लिए दिल्ली जाने की तैयारी कर रहे थे। इस दौरान पुलिस ने कार्रवाई करते हुए सभी को हिरासत में ले लिया। पुलिस की इस कार्रवाई के चलते छात्र दिल्ली रवाना नहीं हो सके।