एएमयू लॉ फैकल्टी में महिला प्रवक्ता पर लगे मानहानि के आरोपों को सही पाते हुए अदालत ने छह माह की सजा व एक लाख रुपये जुर्माने से दंडित किया है। यह फैसला झूठा मुकदमा दर्ज कराने पर लॉ फैकल्टी डीन की ओर से दायर परिवाद में निचली अदालत ने सुनाया है।
इस प्रकरण में आरोपी प्रवक्ता पूर्व में ही निलंबित हैं। अदालत के आदेश के अनुसार अर्थदंड से 75 हजार प्रतिकर के रूप में परिवादी को दिए जाएंगे।
इकरा कॉलोनी कयाम कांप्लेक्स की डा.तंजीम फातिमा एएमयू की लॉ फैकल्टी में प्रवक्ता थीं, जो फिलहाल निलंबित चल रही हैं। डा. फातिमा ने 22 जनवरी 2007 को थाना क्वार्सी में धारा 147ए, 336, 342, 323, 504 और 364 के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमे लॉ फैकल्टी के डीन प्रो. फैजान मुस्तफा, असिस्टेंट प्रॉक्टर वसीम अली समेत अन्य को आरोपी बनाया गया था।
आरोप मारपीट और कार में आग लगाने का था। इस मामले में पुलिस ने आसिफ नवी खान, गीतम सिंह व आबिद अंसारी के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल कर दी। बाकी लोगों के नाम निकाल दिए थे। इस पर पलटवार करते हुए लॉ फैकल्टी डीन फैजान मुस्तफा ने डा. फातिमा पर मानहानि का आरोप लगाते हुए परिवाद दायर कर दिया।
परिवाद में कहा कि डा. फातिमा ने एक जुलाई को इशरत हुसैन, फैजान मुस्तफा द्वारा घर आकर धमकाने का आरोप लगाया था। इसके जवाब में डीन ने 23 जुलाई को उपकुलपति को लिखे पत्र में आरोप बेबुनियाद बताए। कहा कि एक जुलाई को वह देश में ही नहीं थे। उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से झूठी शिकायत की गई है।
परिवाद का संज्ञान लेते हुए एसीजेएम. 6 प्रहलाद सिंह ने फैसला सुनाते हुए डा. फातिमा को धारा 500 का दोषी मानते हुए छह माह की सजा व एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। साथ ही प्रशासन को परिवादी का पासपोर्ट वापस करने के निर्देश दिए।