पकड़े गए आरोपियों में अब्दुल्ला अर्सलान वर्ष 2001 में एएमयू से पेट्रो केमिकल में बीटेक किया। माज बिन तारिक एएमयू से स्नातक की पढ़ाई कर रहा है। तलहा का नाम आया, जो शहर के किसी संस्थान से फैशन डिजाइनिंग का कोर्स किया था।
सिमी के बाद अब नया छात्र संगठन रडार पर
एक दौर था जब सिमी देश विरोधी गतिविधियों में शामिल पाया गया। उसके शमशाद मार्केट स्थित मुख्यालय पर सील लगाकर संगठन को प्रतिबंधित किया गया। यह सील आज भी लगी है। हालांकि उसकी गतिविधियां अब विलुप्त जैसी हैं। कहा जाता है कि सिमी के अधिकांश सदस्य या तो बुजुर्ग होकर निष्क्रिय हो गए या फिर युवा सदस्य दूसरे संगठनों से जुड़ गए। मगर अब एएमयू के ही छात्रों का दूसरा संगठन सामने आया है, जिससे जुड़े छात्रों की गतिविधियां लगातार आईएस से जुड़ी पाई जा रही हैं।
इन वजहों से अलीगढ़ रहा रडार पर
- सिमी की स्थापना के साथ-साथ यहां उसका मुख्यालय होना।
- कश्मीर से आने वाले कपड़ों में 1992 में एके-47 छिपाकर लाना।
- एके-47 मिलने के बाद 35 वर्ष से फरार आतंकी का आज तक सुराग नहीं।
- नागौरी द्वारा अलीगढ़ की मदद से ब्लास्ट प्लान करने के साक्ष्य मिलना।
- अहमदाबाद ब्लास्ट के बाद आतंकी का अलीगढ़ रुककर जाना।
- कानपुर धमाकों के बाद एनकाउंटर में मारे व पकड़े आतंकी अलीगढ़ में रुके थे।
- होशंगाबाद में गिरफ्तार आतंकी द्वारा खुद को अलीगढ़ कोचिंग स्वीकारी।
- कश्मीर के छात्र मन्नान वानी द्वारा एएमयू में ही रहकर पढ़ाई करना।
- मन्नान वानी के भागने के बाद पकड़े शुभान ने अलीगढ़ रुकना स्वीकारा।
- फिर एकाएक आतंकी संगठन में शामिल होना, एन्काउंटर में मारा जाना।
- दोदपुर के फ्लैट से 21वर्ष बाद सिमी का एक सर्वेसर्वा पकड़ा जाना।
एएमयू के ही पूर्व छात्र व भाजपा नेता डा.निशित ने इस पूरे मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री को पत्र भेजा है। उन्होंने कहा है कि यहां लाखों छात्र शिक्षा प्राप्त कर विभिन्न क्षेत्रों में अपनी सेवाएं प्रदान कर रहे हैं। परंतु वर्तमान में अनैतिक कारण एवं राष्ट्र विरोधी गतिविधियों के चलते हुए विश्वविद्यालय में अराजकता और कट्टरपंथ का माहौल है। हाल ही में हुई गिरफ्तारी इसी का परिणाम हैं। इसे लेकर एएमयू इंतजामिया की भेदभाव की नीती उजागर होती है। अभी तक इन पर कोई कार्रवाई न होना उदाहरण है कि एएमयू इन्हें देश विरोधी मानने के पक्ष में नहीं है। इनका एक अघोषित कार्यालय कैंपस में आईएस के लिए काम करता है। आज तक इन पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है। ऐसे मामलों में एएमयू को निर्देशित किया जाए कि ऐसे छात्रों पर सख्त कार्रवाई कर राष्ट्रहित में एक उदाहरण प्रस्तुत करें ।
ये सही है कि हमारे यहां से लगातार कुछ छात्र पकड़े गए हैं। मगर आज तक हमें किसी एजेंसी ने लिखित में सूचना नहीं दी। अगर कोई लिखित में सूचना दे तो कार्रवाई करें। क्या पता कि वे सिर्फ पूछताछ के लिए लेकर गए हों। फिर छोड़ दें, ऐसे में हमारे स्तर से निलंबन उसके भविष्य से खिलवाड़ होगा।-प्रो.वसीम अली, प्रॉक्टर
तो क्या एएमयू करती है भेदभाव
ये तो एजेंसियों के स्तर से गिरफ्तारी के बाद का हाल है। एएमयू को लिखित सूचना का इंतजार है। मगर जब कैंपस में कोई घटना हो या न हो, आरोप भर में एएमयू संबंधित छात्र का निलंबन कर देती है। इसका ताजा उदाहरण बागपत के एक छात्र का निलंबन और मुकदमा है।