एएमयू एग्जीक्यूटिव काउंसिल की बैठक 2 अप्रैल एवं कोर्ट की बैठक 7 अप्रैल हो होने जा रही है। ईसी में नए कुलपति के लिए पांच नामों का पैनल बनेगा, जिसे कोर्ट द्वारा अनुमोदित कर राष्ट्रपति के पास भेजा जाएगा।
ईसी द्वारा प्रस्तावित पांच नामों के पैनल से दो नाम कोर्ट सदस्य निकाल सकते है। यह पैनल ऐसे समय में बनने जा रहा है जब एएमयू अल्पसंख्यक स्वरूप का मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है और मौजूदा केंद्र सरकार अपने पूर्व के सरकार से जुदा हलफनामा दायर करने का इच्छा जता चुकी है। इसके साथ ही केंद्र एवं यूनिवर्सिटी के आपसी संबंध को लेकर तरह-तरह के सवाल उठ रहे है। ऐसे विकट क्षण में माना जा रहा है कि एग्जीक्यूटिव काउंसिल एवं कोर्ट सदस्यों का निर्णय एएमयू के भविष्य के लिए निर्णायक है।
इधर एएमयू कुलपति बनने का सपना देख रहे लोग एवं उनके समर्थक एड़ी चोटी एक किए हुए है। ईसी एवं कोर्ट सदस्यों से नाते-रिश्ते जोड़े जा रहे है और जमकर खातिरदारी हो रही है। भविष्य के सुनहरे सपने भी दिखाए जा रहे है। इंतजामिया द्वारा ईसी सदस्यों के पास करीब 18 नामों की सूची भेजे जाने के बाद जोड़-तोड़ का खेल जोरों पर चल रहा है। कुछ लोग तो आश्वस्त है कि उनका नाम ईसी के पैनल में जाना लगभग तय है। ऐसे लोग कोर्ट से भी अपना नाम पास कराने के लिए प्रयास शुरू कर दिए है।
कैंपस के चर्चें पर भरोसा करे तो कुछ लोग तो यह प्रयास भी कर रहे है कि ईसी पैनल में शामिल पांचों नामों को बिना हटाए राष्ट्रपति के पास भेज दिया जाए। इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि कोर्ट में कुछ नामों पर सदस्य आपत्ति दर्ज कर सकते है। कुछ लोग यह आशंका भी जता रहे है कि पैनल में प्रोफेसर का नाम गया तो ऊपर शेष नामों को दरकिनार किया जा सकता है। इसके पीछे यूजीसी अधिनियम 2010 का उल्लेख किया जा रहा है। यह भी डर है कि केंद्र सरकार यूजीसी अधिनियम 2010 के बदले एएमयू एक्ट से बने वीसी के पैनल को स्वीकार करेगी या नहीं। ईसी बैठक एवं उसके एजेंडा की सूचना समय पर नहीं भेजे जाने की चर्चा भी कैंपस में है।