अलीगढ़। एएमयू के मॉर्डन इंडियन लैंग्वेज डिपार्टमेंट के प्रोफेसर डॉ.श्रीनिवासन रामचंद्र सिरास का नाम इस शहर के लिए नया नहीं। गे-स्कैंडल से चर्चाओं में आए सिरास की सुसाइड के बाद मुद्दे ने तूल पकड़ा था। मगर पारिवारिक पैरवी और साक्ष्यों के अभाव में मुकदमा दाखिल दफ्तर हो गया। अब प्रोफेसर सिरास और उनके चरित्र पर मनोज वाजपेयी अभिनीत फिल्म ‘अलीगढ़’ 26 फरवरी को रिलीज हो रही है। खास बात यह है कि फिल्म सोशल साइट्स से लेकर सेंसर बोर्ड तक प्रोफेसर सिरास की असल कहानी से ज्यादा चर्चित में है। फिल्म को लेकर लोग बेहद उत्सुक हैं।
प्रकरण एक नजर मेंफरवरी 2010 में गे-स्कैंडल से चर्चाओं में आए थे डा. एसआर सिरास9 फरवरी 2010 को मिस कंडक्ट के आरोप में एएमयू से निलंबित7 अप्रैल 2010 की शाम बदबू आने पर किराये के घर से मिला था शव6 जून 2010 को सिरास के भाई ने क्वार्सी में दर्ज कराई थी सुसाइड रिपोर्ट2010 के अंत में साक्ष्यों के अभाव में मुकदमे में लगा दी गई एफआर
फिल्म को ए सर्टिफिकेट मिलने से चर्चा में जोर गे-स्कैंडल के चलते अंतर्राष्ट्रीय पटल पर चर्चा बटोर चुकी फिल्म का ट्रेलर 1 फरवरी को जारी हो चुका है। यह ए सर्टिफिकेट मिलने से भी सुर्खियाें में है। लोग इसको लेकर बेहद उत्सुक हैं कि आखिर इसमें ऐसा क्या दिखाया गया है, जिसकी वजह से सेंसर बोर्ड से इसे ए सर्टिफिकेट मिला है। फिल्म 26 फरवरी को रिलीज होगी।
6 माह का प्रोफेसर सिरास प्रकरण नागपुर महाराष्ट्र के प्रोफेसर सिरास क्वार्सी इलाके की दुर्गाबाड़ी की गली नंबर दो निवासी अधिवक्ता सुभाष चंद्र कमल के मकान में किराए पर रहते थे। निलंबन के बाद वह घर की चारदीवारियाें में कैद रहने लगेे थे। 7 अप्रैल की शाम दुर्गंध आने पर सिरास का शव उनके कमरे में बेड पर पड़ा मिला था। पोस्टमार्टम के बाद उनका शव नागपुर से आए परिजनों के सुपुर्द कर दिया था।
इस घटना के 62वें दिन सिरास के भाई संजीव रामचंद्र ने धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज कराया। जिसमें अज्ञात लोगों पर उनके भाई डा. सिरास का उत्पीड़ित कर उन्हें आत्महत्या के लिए प्रेरित करने का आरोप लगाया था। बाद में मुकदमा एफआर हो गया। इस दौरान एक फोटो जर्नलिस्ट, दो रिक्शा चालक भी चर्चाओं में आए थे। एक रिक्शा चालक ने तो पुलिस उत्पीड़न से तंग आकर जान देने की कोशिश की थी।