अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नौकरी के नाम पर दो लाख रुपये की ठगी किए जाने का मामला प्रकाश में आय था। इसमें एएमयू के ही दो कर्मचारी शामिल थे।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सख्त रुख दिखाते हुए मामले की जांच के बाद दोनों को सेवाओं से निलंबित कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करते हुए पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने दोनों को गिरफ्तार करके जेल भेज दिया है।
एएमयू के जनसंपर्क अधिकारी डॉ. राहत अबरार ने बताया कि एएमयू के एकाउंट विभाग में मेहशर आलम एलडीसी के पद पर कार्यरत है। इसके अलावा मो. उमर नदीम तरीन हॉल में गेट कीपर के पद पर तैनात है।
फिरोजाबाद निवासी मो. इमरान किसी तरह गत वर्ष अक्तूबर में मो. उमर के संपर्क में आया। उसके माध्यम से वह मेहशर आलम से मिला। मेहशर ने मो. इमरान को एएमयू में नौकरी दिलवाने की बात कही और बदले में दो लाक रुपये मांगे। इमरान ने एक लाख रुपये मेहशर के खाते में जमा करा दिए। बकाया एक लाख रुपये भी किश्तों में दे दिए। लेकिन मो. इमरान की नौकरी नहीं लगी। कोई नतीजा निकलता नहीं देख इमरान ने मेहशर और मो. उमर से अपने पैसे वापस मांगे।
जिससे विवाद की स्थिति बनी। इमरान ने इसकी शिकायत विश्वविद्यालय प्रशासन से कर दी। मामले की जांच हुई जिसके बाद स्पष्ट हो गया कि विश्वविद्यालय के दोनों कर्मचारी दोषी हैं। डॉ. अबरार ने बताया कि हालांकि दोनों ने इमरान को उससे लिए दो लाख रुपये वापस दे दिए हैं लेकिन इसके बाद दोनों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जिससे अन्य लोगों को इससे सबक मिल सके। एएमयू में नौकरी केवल योग्यता और क्षमता से मिलती है।