कौशल कुमार ओझाएएमयू एवं जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक स्वरूप को लेकर केंद्र सरकार के बदले रुख के बाद मुस्लिम संगठनों की गोलबंदी शुरू हो गई है। स्टूडेंट इस्लामिक आर्गेनाइजेशन (एसआईओ) एवं मुस्लिम स्टूडेंट आर्गेनाइजेशन (एमएसओ) समेत कई संगठन केंद्र के फैसले के खिलाफ सामने आ गए है। अलीगढ़ ही नहीं बल्कि दूसरे शहर एवं राज्य के संगठन भी इसको लेकर सामने आने लगे है।
11 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अटार्नी जनरल ने एएमयू को अल्पसंख्यक स्वरूप मानने से इंकार कर दिया था। इसके साथ ही यूपीएस सरकार द्वारा इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका वापस लेने का आग्रह किया था। इसके बाद से एएमयू में भूचाल की स्थिति है।
केंद्र का रुख सामने आने के बाद इंतजामिया द्वारा तमाम महत्वपूर्ण संगठन एवं बॉडी के सदस्यों के साथ बैठक कर पूरे परिदृश्य से अवगत कराया गया। एएमयू ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन, अमुटा, टेक्निकल स्टॉफ एसोसिएशन, नॉन टेक्निकल स्टॉफ एसोसिएशन एवं रेजीडेंट डॉक्टर्स एसोसिएशन समेत अन्य संगठनों ने एक स्वर में अल्पसंख्यक स्वरूप की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट में मजबूती से लड़ने एवं इंतजामिया को हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया था।
इस केस में पार्टी होने के कारण ओल्ड ब्वायज एसोसिएशन द्वारा अलग से अधिवक्ता भी रखा जा रहा है। एएएमयू छात्र वीएम हॉल एवं अन्य कई स्थानों पर बैठक कर चुके है। 30 जनवरी को जनरल बॉडी की बैठक होने जा रही है, जिसमें कुछ महत्वपूर्ण निर्णय लिए जा सकते है। कोल विधायक एवं सपा नेता हाजी जमीरउल्लाह खां भी इस मसले को लेकर मैदान में कूद चुके है।
अलीगढ़ में सक्रिय एसआईओ केंद्र के रुख का विरोध कर चुकी है। इसके साथ ही एमएसओ भी विरोध कर रही है। इंतजामिया द्वारा इस मसले को लेकर प्रधानमंत्री से बातचीत करने के लिए समय मांगा गया है। प्रतिनिधि मंडल की सूची में एक प्रसिद्ध धर्मगुरु का भी नाम है।
सूत्रों पर भरोसा करे तो अलीगढ़ ही नहीं बल्कि देश भर की मुस्लिम संगठनों की एएमयू एवं जामिया मिल्लिया को लेकर गोलबंदी शुरू हो गई है और इस मसले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी चल रही है। एएमयू छात्र एवं पूर्व छात्र अल्पसंख्यक स्वरूप की लड़ाई सुप्रीम कोर्ट के साथ राजनीतिक मोर्चे पर भी लड़ने का प्रयास कर रहे हंंै। 25 जनवरी को छात्रों एवं प्रमुख लोगों की एक बैठक कैनेडी हाल में होने वाली है।