अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) ने एक शोधार्थी को अनजाने में दूसरे विषय की पीएचडी डिग्री दे दी। पांच साल गुजरने के बाद पीएचडी धारक को बताया गया कि भाषा विज्ञान में उसे जो डिग्री दी गई है, उसकी जगह पीएचडी इन एलएएमएम (लैंग्वेज ऑफ एडवरटाइजिंग मीडिया इन मार्केटिंग) होना चाहिए, क्योंकि उसे अनजाने में भाषा विज्ञान में पीएचडी की डिग्री दी गई है। एएमयू इंतजामिया ने इसकी वजह टाइपिंग में गलती होना स्वीकार किया है।
विश्वविद्यालय के फैसले से नाराज डॉ. दानिश रहीम ने उच्च न्यायालय की शरण ली है, जहां इस मामले में सुनवाई सात दिसंबर को है। डॉ. दानिश का कहना है कि उनके साथ यूनिवर्सिटी ने जो छल किया है, वह काफी डरावना और परेशान करने वाला है। डॉ. दानिश ने बताया कि 27 अक्तूबर 2016 को उन्होंने भाषा विज्ञान विभाग में शोधार्थी के रूप में दाखिला लिया था। पीएचडी अवार्ड 9 मार्च 2021 को हुई। उन्होंने बताया कि उनकी सुपरवाइजर डॉ. सादिया हुसैन हसन थीं। पीएचडी का विषय ‘न्यूज टॉक : इन्वेस्टिंग द लैंग्वेज ऑफ हिंदी-उर्दू न्यूज मीडिया’ था।
डॉ. दानिश के मुताबिक, पांच साल बाद यूनिवर्सिटी के को-ऑर्डिनेटर मुजीब उल्ला जुबैरी की ओर से 4 अगस्त 2021 को मुझे व डॉ. मारिया नईम को नोटिस जारी करके बताया गया कि अनजाने में भाषा विज्ञान में पीएचडी की डिग्री दी गई है, जबकि एलएएमएम में पीएचडी की डिग्री दी जानी चाहिए थी। इसलिए अब भाषा विज्ञान की पीएचडी की डिग्री की जगह उनको एलएएमएम में डिग्री दी जाएगी। पूर्व में दी गई पीएचडी डिग्री कंट्रोलर ऑफिस में जमा कर दें।
इस संबंध में एएमयू जनसंपर्क कार्यालय के मेंबर इंचार्ज प्रो. शाफे किदवई ने बताया कि दानिश ने एलएएमएम में एमए किया था। भाषा विज्ञान विभाग ही एलएएमएम में पीएचडी कराता है। ऐसे में उसका पीएचडी में प्रवेश भी एलएएमएम में हुआ था। लेकिन टाइपिंग गलती के चलते पीएचडी इन एलएएमएम की जगह पीएचडी इन भाषा विज्ञान हो गया है।