एएमयू छात्रों की राजनीतिक चेतना के फलक का विस्तार कितना व्यापक है उसका उदाहरण आप इससे लगाएं कि वह मिस्र के एक इस्लामिक विद्वान के खुले विरोध में उतर जाते है। मिस्र के मुफ्ती की गलती सिर्फ इतनी थी कि उनके देश मिस्र की इजराइल से नजदीकियां हैं। आलम यह था कि मिस्र के मुफ्ती राज्य अतिथि थे। एएमयू इंतजामिया ने इन्हें बड़े ऐहतराम के साथ न्योता दिया था। मुफ्ती को भी इस बाद का अंदाजा नहीं रहा होगा कि जहां वह मेहमान बनकर जा रहे हैं वहीं उन्हें गो बैक जैसे नारे सुनने को मिलेंगे।
उल्लेखनीय है कि इजराइल से लगभग पूरे अरब जगत का छत्तीस से आंकड़ा है। ये छात्र बहुधा फिलस्तीन की हिमायत और इजराइल दूसरी ओर यही छात्र मणिपुर की हिंसा के खिलाफ भी प्रदर्शन करते हैं। राजनीतिक और सामाजिक चेतना से इतर कई बार इन छात्रों का प्रदर्शन पूरे देश में चर्चा का विषय भी बन जाता है। सीएए और एनआरसी के विरोध में विद्यालय परिसर का माहौल महीनों उबाल पर रहा था।
एएमयू छात्रों ने दिल्ली में सामूहिक दुष्कर्म का शिकार हुई निर्भया को इंसाफ दिलाने के लिए कई दिनों तक प्रभावशाली प्रदर्शन किया था। दिल्ली में जंतर-मंतर पर धरना दे रहे पहलवानों की हिमायत में भी एएमयू के छात्र सड़कों पर उतरे थे। एएमयू छात्रों के जो प्रदर्शन चर्चाओं में रहे उनमें हिजाब प्रकरण पर छात्रा की आजादी का समर्थन, उन्नाव दुष्कर्म प्रकरण, उत्तराखंड के 4000 मजारों को खाली कराना, पैगंबर पर टिप्पणी करने के आरोपी स्वामी नरसिंहानंद का विरोध, सपा नेता अबू आसिम के खिलाफ प्रदर्शन शामिल है।