एएमयू इंजीनियरिंग कॉलेज द्वारा तैयार की गई फेस शील्ड
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अलीगढ़। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के जाकिर हुसैन कालेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलाॅजी के दो वैज्ञानिकों ने बहुत ही कम लागत की फेस शील्ड तैयार की है। इसके इस्तेमाल से कोरोना वायरस संक्रमित मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर संक्रमण से बच सकेंगे। मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल और डॉक्टरों ने इस फेस शील्ड की सराहना की है और इसे बचाव के लिए बहुत कारगर बताया है। कोरोना वायरस की जांच व इलाज को लेकर कई शहरों में डाक्टर खुद संक्रमित हो रहे हैं। इसको लेकर भारत सहित विश्व के सभी देशों में पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्रिवमेंट) की भारी कमी है। इस पर जे.एन. मेडीकल कालेज के डाक्टरों की सलाह व उनकी जरूरत को देखते हुए एएमयू के जाकिर हुसैन कालेज आॅफ इंजीनियरिंग एण्ड टेक्नोलाॅजी के पेट्रोलियम स्टडीज विभाग के डा. सैयद जावेद अहमद रिजवी और मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डा. सैयद फहद अनवर ने बहुत ही कम समय में और कम लागत में डाक्टरों के लिए उपयोग में लाई जाने वाली फेस शिल्ड की डिजायन और प्रोटोटाइप तैयार किया। एक हफ्ते के अन्दर इन दोनों ने घरेलू उपयोग की वस्तुओं से पांच प्रोटोटाइप तैयार किये। बहुत ही कम समय और कम लागत में फोम, प्लास्टिक शीट व इलास्टिक द्वारा तैयार यह फेस शील्ड डाक्टरों की सुरक्षा के लिए बहुत आवश्यक है। जेएन मेडिकल कालेज के डाक्टरों की सलाह व जरूरत को देखते हुए यह फेस शील्ड बिना किसी मशीन के व लोकल मार्केट में उपलब्ध सामान से बनाई गई है। डाक्टरों की सलाह से उसमें बदलाव कर फेस शील्ड का माॅडल तैयार किया, जिसको बिना मशीन के लोकल मार्केट में उपलब्ध सामान से बनाया जा सकता है। इस फेस शील्ड को सिंगल यूज में लाया जायेगा और इस कारण से डाक्टरों में होने वाले संक्रमण से बचाव हो सकेगा। इस फेस शील्ड को बनाने वाले डा. सैयद जावेद अहमद रिजवी और डा. सैयद फहद अनवर का कहना है कि कोरोना वायरस से डाक्टरों को सुरक्षित रखने के लिए तथा देश में पीपीई की कमी को देखते हुए लो कोस्ट डिसपोजिबल फेस शील्ड का निर्माण किया। इस तकनीकी को वह भारत के कोने कोने में पहुंचाना चाहते है। वह यह भी चाहते है कि विश्व के अन्य देश जो पीपीई किट की कमी से जूझ रहे हैं, उनके लिए इस फेस शील्ड की निर्माण की विधि को उपलब्ध कराया जाये। उन्होंने बताया कि इसको तैयार करने में ऐसी चीजों का प्रयोग किया गया है। जो आसानी से घर में व स्टेशनरी की दुकानों पर उपलब्ध हो सकती है। इसमें फोम,प्लास्टिक शीट व इलास्टिक है। इस पर 10 से 15 रूपये की लागत आती है। जे.एन. मेडिकल कालेज के प्रिंसिपल प्रो. शाहिद अली सिद्दीकी का कहना है कि महामारी की समस्या से डाक्टर लाॅक डाउन के चलते कम संसाधन से जूझ रहे हैं। ऐसे में उनकी सुरक्षा के लिए इन दोनों प्रोफेसरों ने फेस शील्ड तैयार कर काफी मदद की है। अभी इसका निर्माण कम तादाद में हो रहा है जो शीघ्र ही बड़े पैमाने पर निर्माण किया जायेगा और अन्य शहरों में भी भेजा जाएगा। जांच के दौरान मरीज के खांसने, छींकने से डाक्टर को संक्रमित होने से यह फेस शील्ड बचाएगा।